NOW HINDUSTAN. कोरबा। राजस्व पटवारी संघ की बेमियादी हड़ताल पर प्रशासनिक कार्रवाई का भी कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। जिलाध्यक्ष मिथलेश कुमार वर्मा के निलंबन और जिले के 175 हड़ताली पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बावजूद पटवारी अपने आंदोलन पर डटे हुए हैं। सोमवार को हड़ताल के 20वें दिन भी सभी पटवारी घंटाघर चौक स्थित धरना स्थल पर एकत्रित हुए और शासन-प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। इस दौरान हड़ताली पटवारियों ने नोटिस की प्रतियां जलाकर विरोध जताया और स्पष्ट कहा कि वे किसी भी दमनात्मक कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।
राजस्व पटवारी संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर पटवारी 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। हड़ताल के कारण आम लोगों के राजस्व संबंधी महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं फसल गिरदावरी का काम भी बाधित होने से आगामी 15 नवंबर से प्रस्तावित धान खरीदी अभियान को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी बीच शासन के निर्देश पर प्रशासन ने हड़ताली पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। बलरामपुर जिले में पांच पटवारियों पर निलंबन की कार्रवाई हुई है, जबकि कोरबा में संघ के जिलाध्यक्ष मिथलेश कुमार वर्मा को निलंबित किया गया है।
जिलाध्यक्ष के निलंबन के बाद भी नहीं दिखा कार्रवाई का डर
कोरबा जिले के 254 पटवारी हल्कों में कुल 201 पटवारी पदस्थ हैं। इनमें से 175 पटवारी हड़ताल पर हैं। प्रशासन ने इन सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं जिलाध्यक्ष मिथलेश कुमार वर्मा को शासकीय दायित्वों के प्रति लापरवाही और उदासीनता बरतने तथा कारण बताओ नोटिस का समय पर संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं करने के आधार पर निलंबित किया गया है।
इसके बावजूद सोमवार को कार्यालयीन समय समाप्त होने तक किसी भी हड़ताली पटवारी के काम पर लौटने की सूचना नहीं मिली। उल्टे घंटाघर चौक स्थित धरना स्थल पर पटवारियों ने एकजुटता दिखाते हुए प्रशासनिक कार्रवाई को दमनात्मक करार दिया। उन्होंने कहा कि निलंबन और नोटिस जैसी कार्रवाई से आंदोलन कमजोर नहीं होगा।
जितनी बड़ी कार्रवाई होगी, उतनी ऊर्जा से जारी रहेगा आंदोलन
राजस्व पटवारी संघ के जिला प्रवक्ता ओमप्रकाश प्रधान ने कहा कि संघ प्रदेशव्यापी आह्वान पर अपनी चार सूत्रीय जायज मांगों को लेकर 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहा है। पटवारी शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर राजस्व संबंधी महत्वपूर्ण कार्यों में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद मांगों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय शासन दमनात्मक नीति अपना रहा है।
उन्होंने कहा कि अन्य जिलों में पटवारियों पर कार्रवाई के बाद अब कोरबा जिलाध्यक्ष को निलंबित करना संघ की एकता तोड़ने का प्रयास है। यह केवल एक पटवारी पर कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे पटवारी संवर्ग पर कार्रवाई के समान है। उन्होंने कहा कि सरकार जितनी दमनात्मक कार्रवाई करेगी, संघ उतनी ही ऊर्जा और जोश के साथ आंदोलन जारी रखेगा। किसी भी दबाव में पटवारी पीछे हटने वाले नहीं हैं।
धान खरीदी को लेकर भी उठाए सवाल
जिला प्रवक्ता ने कहा कि धान खरीदी का समय नजदीक है और यह फसल के रकबे का विवरण अपडेट करने का महत्वपूर्ण समय है। इस काम में पटवारियों की भूमिका अहम है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पटवारियों की मांगों को अनसुना कर रही है, जबकि उनके बिना धान खरीदी की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे समय में कार्रवाई तेज किए जाने से किसानों की धान खरीदी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पटवारियों की चार सूत्रीय प्रमुख मांगें
पटवारी संवर्ग से राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया प्रारंभ की जाए।
वर्ष 2017 में रोड-पे संशोधन के फलस्वरूप उत्पन्न वेतन विसंगति का निराकरण किया जाए।
पीवी ऐप के स्थान पर डीसीएस के माध्यम से शुद्ध एवं त्रुटिरहित फसल गिरदावरी कराई जाए।
आंदोलन की पृष्ठभूमि में की गई निलंबन, स्थानांतरण एवं कारण बताओ नोटिस संबंधी कार्रवाइयों को निरस्त किया जाए।
प्रशासन का पक्ष : 175 को नोटिस, एक पटवारी निलंबित
प्रशासनिक पक्ष के अनुसार, कोरबा जिले में एक पटवारी को निलंबित किया गया है, जबकि 175 हड़ताली पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। सोमवार को कार्यालयीन समयावधि तक किसी भी पटवारी के उपस्थित होकर कार्यस्थल पर लौटने की सूचना नहीं मिली है। उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नोटिस की प्रतियां जलाकर जताया विरोध
सोमवार को घंटाघर स्थित धरना स्थल पर हड़ताली पटवारियों ने प्रशासन द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। पटवारियों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। अब देखना होगा कि शासन और पटवारी संघ के बीच जारी गतिरोध का समाधान कब निकलता है।
