
NOW HINDUSTAN. कोरबा। B.Ed. प्रमाणपत्र को लेकर चल रहे विवाद के बीच शिक्षकों के बीच विवाद का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ओमप्रकाश बघेल ने सिविल लाइन थाना में अनिल रात्रि और मुकुंद उपाध्याय के खिलाफ गाली-गलौज करने तथा जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में मामले की जांच कर आरोपियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
कोरबा सीएसपी प्रतीक त्रिवेदी ने बताया कि अंधरी कछार स्कूल में आयोजित बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। इस मामले में ओमप्रकाश बघेल की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है, जिसकी पुलिस जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि दूसरे पक्ष की ओर से भी शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी भी जांच की जाएगी।
B.Ed. प्रमाणपत्र को लेकर पहले से चल रहा विवाद
बताया गया है कि ओमप्रकाश बघेल ने कुछ दिन पहले मुकुंद उपाध्याय के B.Ed. प्रमाणपत्र को लेकर शिकायत की थी। शिकायत में प्रमाणपत्र की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति स्कूल में नियमित रूप से कार्यरत रहते हुए मध्यप्रदेश के बालाघाट से नियमित B.Ed. पाठ्यक्रम का प्रमाणपत्र कैसे प्राप्त कर सकता है।
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि B.Ed. पाठ्यक्रम में नियमित अध्ययन के लिए आवश्यक अनुमति बाद में ली गई। ऐसे में यह जांच का विषय है कि संबंधित अवधि में स्कूल से विधिवत अवकाश लिया गया था या नहीं। यदि अवकाश नहीं लिया गया था तो नियमित B.Ed. पाठ्यक्रम में उपस्थिति और अध्ययन किस प्रकार किया गया, इसकी भी जांच जरूरी है।
शिकायत के अनुसार जिस कॉलेज से B.Ed. पाठ्यक्रम किए जाने का दावा किया गया है, वहां नियमित पाठ्यक्रम दो वर्ष तथा स्वाध्यायी पाठ्यक्रम तीन वर्ष का बताया गया है। ऐसे में संबंधित प्रमाणपत्र, प्रवेश प्रक्रिया, उपस्थिति, अवकाश और विभागीय अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
निष्पक्ष जांच से सामने आ सकता है पूरा मामला
B.Ed. प्रमाणपत्र को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि फिलहाल जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस और संबंधित विभाग द्वारा यदि प्रमाणपत्र की सत्यता, अध्ययन अवधि, उपस्थिति, स्कूल से ली गई अनुमति तथा अन्य दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की जाती है, तो मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की जाएगी।




