
NOW HINDUSTAN. कोरबा। समय से पहले जन्म और बेहद कम वजन के कारण गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे जुड़वां शिशुओं ने आखिरकार जिंदगी की जंग जीत ली। NKH सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, कोरबा की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में करीब एक माह तक चले उपचार और विशेष देखभाल के बाद 12 अक्टूबर को दोनों बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। जन्म के समय महज 870 ग्राम वजन वाले शिशु की हालत में भी उपचार के बाद उल्लेखनीय सुधार हुआ।
31वें सप्ताह में हुआ था जन्म
दोनों जुड़वां बच्चों का जन्म गर्भावस्था के 31वें सप्ताह में हुआ था। जन्म के समय एक शिशु का वजन केवल 870 ग्राम और दूसरे का वजन 1 किलो 60 ग्राम था। समयपूर्व जन्म के कारण दोनों बच्चों को सांस लेने में परेशानी, सेप्सिस यानी गंभीर संक्रमण और एनीमिया जैसी जटिलताओं का सामना करना पड़ा। वहीं, एक शिशु में ब्लड शुगर का स्तर कम होने और समयपूर्व जन्म से जुड़ी आंखों की बीमारी रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (ROP) की समस्या भी सामने आई।
विशेषज्ञों की निगरानी में चला उपचार
बाल एवं नवजात रोग विशेषज्ञ डॉ. अजीत ठोकल के मार्गदर्शन में NICU में दोनों बच्चों का लगातार उपचार किया गया। चिकित्सकीय टीम ने उनकी सांस, ऑक्सीजन स्तर, हृदय गति, ब्लड शुगर, शरीर के तापमान और पोषण की नियमित निगरानी की। जरूरत के अनुसार श्वसन सहायता, दवाइयां और विशेष पोषण उपलब्ध कराया गया। लगातार उपचार और विशेष देखभाल के परिणामस्वरूप 870 ग्राम वजन वाले शिशु का वजन बढ़कर 1 किलो 450 ग्राम हो गया। दोनों बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार होने के बाद चिकित्सकों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी।
प्रीमैच्योर बच्चों के लिए विशेष देखभाल जरूरी
यह मामला समयपूर्व जन्म लेने वाले बच्चों के उपचार में विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक सुविधाओं से युक्त NICU की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार, जुड़वां गर्भावस्था या समय से पहले प्रसव की आशंका होने पर ऐसे अस्पताल का चयन करना जरूरी है, जहां नवजात रोग विशेषज्ञ, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और आवश्यक श्वसन सहायता की सुविधाएं उपलब्ध हों।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी समयपूर्व जन्मे बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, उचित पोषण और विशेष देखभाल आवश्यक होती है। खासकर आंखों की जांच और डॉक्टर द्वारा निर्धारित फॉलो-अप समय पर कराना महत्वपूर्ण है। दोनों जुड़वां शिशुओं की सुरक्षित घर वापसी समय पर उपचार, निरंतर चिकित्सकीय निगरानी और समर्पित देखभाल के महत्व को रेखांकित करती है।




