


जिला स्तरीय सुपर गर्ल्स प्रतियोगिता में उड़ीसा सीमावर्ती देवभोग सहित बीहड़ जंगलों से आई बालिकाओं ने भी अपने प्रतिभा से सबको प्रभावित किया। कलेक्टर श्री छिकारा ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मेहनत में कभी कमी नहीं रहनी चाहिए। हमें कभी सेल्फ डाउट नहीं करना चाहिए। लगातार मेहनत करते रहना चाहिए। कभी अपने मन से निराश नहीं होना है। कड़ी मेहनत से सफलता निश्चित मिलती है। जिला प्रशासन की नई-नई गतिविधियों द्वारा बालिकाओं के अंदर छिपे हुनर को तराशने का प्रयास किया जा रहा है। बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने हेतु सात विधाओं में चरणबद्ध तरीके से सुपर गर्ल्स प्रतियोगिता आयोजित है। बेटियां अनुशासन, परंपरा, संस्कृति कला से समृद्ध होती है।
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पारंपरिक लोक नृत्य संस्कृति सभ्यता की दिखा झलक – प्रतियोगिता में स्कूली बच्चियों ने कविता, भाषण एवं विभिन्न विधाओं में अपनी हुनर का प्रदर्शन किया। पिता की गुमान, मां की अभिमान, भाई की शान परिवार की पहचान होती है बेटियां और सच कहूं तो दो फूलों को तारने वाली बहुत महान होती है बेटियां। बालिकाओं ने हमारी संस्कृति, धरोहर, पहचान को पारंपरिक वेशभूषा के साथ मनमोहक नृत्य के द्वारा जीवंत प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ी, हिंदी एवं देशभक्ति गीतों पर सुमधुर संगीत से आबद्ध गायन भी किया। निशान, दमऊ, दफड़ा, टासक, नाल, तबला, आर्गन, बैंजो, हारमोनियम के सात सुरों से वाद्य यंत्रों को शास्त्रीय संगीत से जोड़ने का प्रयास किया।


