आज नवरात्रि का तीसरा दिन है जाने मां चंद्रघंटा को कैसे मिला उनका नाम, पूजन मुहूर्त लाभ, प्रिय रंग, पुष्प, भोग स्वरुप व सब कुछ…

Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN  शारदीय नवरात्र का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है 17 अक्टूबर मंगलवार को तीसरा दिन है शारदीय नवरात्र के इस दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार मां दुर्गा का यह स्वरूप परम शांति दायक और कल्याणकारी है माता रानी के मस्तक में घंटे के आकार का अर्थ चंद्र विराजमान है इस वजह से मां का नाम चंद्रघंटा पड़ा।

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मां चंद्रघंटा की सवारी शेर है 10 हाथों में कमल और कमंडल के आकार का अस्त्र शस्त्र है माथे पर अर्धचंद्र ही उनकी पहचान है उनके कंठ में श्वेत पुष्प की माला और शीर्ष पर रत्न जड़ित मुकुट विराजमान है मां चंद्रघंटा हमेेेशा युद्ध की मुद्रा में ही विराजमान रहती है।

मां चंद्रघंटा के पूजा का लाभ :- 

मान्यता है की मां चंद्रघंटा की पूजा करने से मन में शांति प्राप्त होती है मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप के आराधना करने में परम शक्ति का अनुभव होता है भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है । मान्यता है की मां की पूजा में दूध का प्रयोग करना परम कल्याणकारी होता है।

मां चंद्रघंटा की पूजा करने की विधि :-

सुबह सबसे पहले स्नान आदि से निवृत होकर माता का ध्यान करें । मां दुर्गा को फूल, अक्षत ,रोली और पूजा सामग्री अर्पित करे। जिसके बाद  माता की आरती करें । आरती के दौरान शंख और घंटा बजाते रहे । मान्यता है कि ऐसा करने से घर की नेगेटिविटी दूर होती है।

अब माता रानी को भोग लगाए । आप मां चंद्रघंटा की कथा या दुर्गा स्तुति या दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं ।

मां चंद्रघंटा का प्रिया रंग :-

माँ की पूजा करते समय सुनहरे रंग या पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है ।

माँ चंद्रघंटा का प्रिय पुष्प:-

मानता है की मां को सफेद कमल और पीले रंग की गुलाब की माला अर्पित करने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है

मां चंद्रघंटा को भोग :-

मां चंद्रघंटा को केसर की खीर और दूध से बनी मिठाइयां का भोग अर्पित करना चाहिए इसके अलावा पंचामृत, चीनी, मिश्री माता रानी को अर्पित की जाती है।

मां दुर्गा के हर स्वरूप की भक्ति  भक्तों के कल्याण और तरक्की प्रदान करता  है।

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