शरद पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का साया….

Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN korba  शरद पूर्णिमा हिंदू पंचांग में सर्वाधिक धार्मिक महत्व वाली पूर्णिमा है या शरद ऋतु में आती है तथा इसे अश्वनी माह के सितंबर अक्टूबर की पूर्णिमा को मनाया जाता है हिंदू धर्म में विश्वास रखने वाले शरद पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर चंद्रमा की पूजा करते है और खीर का प्रसाद बनाकर खुले आसमान के नीचे रात भर रखा जाता है लेकिन इस साल शरद पूर्णिमा को पूर्ण चंद्र ग्रहण के समय में मनाया जाएगा इस साल 28 अक्टूबर को पड़ रही शरद पूर्णिमा के दिन भारत में चंद्र ग्रहण रहेगा। जिसके चलते पूजा पाठ के समय का खास अध्ययन रखना पड़ेगा। आचार्य गोविंद दुबे ने बताया कि चंद्र ग्रहण मध्य रात्रि में पड़ेगा जबकि इसका सूतक दोपहर बाद से ही प्रारंभ हो जाएगा जिसके चलते शरद पूर्णिमा पर पूजा अर्चना दिन में ही करनी होगी और आधी रात के बाद ही खीर खा सकेंगे । पंडितो के अनुसार इस साल अश्वनी माह की पूर्णिमा तिथि 28 अक्टूबर शनिवार को सुबह 4:17 पर शुरू हो रही है स्थिति का समापन अगले दिन 29 अक्टूबर को रात में 1:53 पर होगा पंडितों के अनुसार मुहूर्त और उसके प्रभाव पंडितों ने बताया कि ग्रहण का स्पर्श रात्रि 1:05 है वही ग्रहण का मध्य रात्रि 1:44 बजे बताया जा रहा है ग्रहण का मुख्य रात्रि 2 24:00 और ग्रहण का सूतक दोपहर 4:05 तक रहेगा ।

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वही पंडितो कहना है पंचांग के अनुसार यह चंद्र ग्रहण कर्क, मिथुन, धनु और कुंभ राशि वालों के लिए शुभ रहेगा वही सही तुला और मीन राशि वालों के लिए मध्यम और मेष ,कन्या, मकर राशि वालों के लिए यदि अशुभ रहेगा । वही अन्य राशियों के लिए सामान्य रहेगा। पंडितों की माने तो मध्य रति के बाद ही खीर बनाना उचित बताया गया है इस ग्रहण का सूतक दोपहर बाद से प्रारंभ होगा जो मध्य रात्रि तक रहेगा इस दिन रात्रि में मंदिरों के पट बंद रहेंगे।

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