एसईसीएल गेवरा खदान में डंपर जलने घटना की रखी एचएमएस ने उच्च स्तरीय जांच की मांग….

Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. कोरबा सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया के अधीन संचालित एसईसीएल बिलासपुर की कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित खुले मुहाने की गेवरा कोयला परियोजना अंतर्गत एसईसीएल गेवरा खदान में डंपर जलने की घटना सामने आने के बाद भारी-भरकम मशीनों के रखरखाव पर सवाल उठने लगे हैं। एचएमएस ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग रखी हैं। संगठन के केन्द्रीय अध्यक्ष रेशम लाल यादव ने एसईसीएल गेवरा एरिया के जीएम को लिखे पत्र में बताया कि बीते दिनों 240 टन वजनी डंपर में आग लगने से कंपनी प्रबंधन को आर्थिक नुकसान हुआ हैं।
पहले भी डंपर में आग लगने की घटना घटित हो चुकी हैं। मिट्‌टी की परत हटाने से लेकर कोयला खनन व परिवहन में भारी-भरकम मशीनों का इस्तेमाल होता है। जिसके अंतर्गत डंपर, क्रेन, डोजर सहित अन्य कई मशीनों का उपयोग होता है। इन मशीनों के रखरखाव का जिम्मा एसईसीएल ने खुली खदानों में निजी कंपनी को सौंपा हैं।
कोयला मजदूर सभा (एचएमएस) के केन्द्रीय अध्यक्ष रेशमलाल ने लिखे पत्र में कहा हैं कि डंपर में फाल्ट आने की जानकारी मेंटेनेंस का जिम्मा संभालने वाली निजी कंपनी को दी गई, लेकिन कंपनी के कर्मियों ने डंपर को पार्किंग यार्ड में लाने कहा। चूंकि अधिक मात्रा में ऑयल लीकेज थी, इसकी वजह से डंपर में आग लग गई। इस घटना की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
पत्र में आरोप लगाते हुए यह भी कहा गया हैं कि डंपर में इंजन स्टॉप सेंसर लगा रहता हैं। इसका काम लो कूलेंट और लो इंजन ऑयल की स्थिति में इंजन बंद हो जाना हैं, लेकिन डंपरों के खराब सेंसर का सुधार कार्य नहीं किया जाता है। इसकी वजह से भी डंपर में आग लगने की घटना सामने आई है। उक्त कंपनी के पास मैनपावर की कमी हैं। इंजीनियर और कुशल कर्मचारियों के नहीं होने से रखरखाव का कार्य प्रभावित होता है। इसका असर खदान के कोयला उत्पादन से लेकर डंपर जलने की घटना तक के द्वारा एसईसीएल को आर्थिक नुकसान के रूप में होता हैं।

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