
NOW HINDUSTAN गर्मी के दिनों में जंगलों में आग लगना आम बात है आग अपने आप तो लगती नहीं है या तो लगाई जाती है या फिर किसी की लापरवाही होती है ऐसी ही एक घटना बाकी मोगरा के रिजर्व फॉरेस्ट 790 में दिखाई दी यहां लगे बस के जंगलों में लगातार दो दिनों तक आग लगी या फिर लगाई गई । कटघोरा में न्यायालय में कार्यरत अधिवक्ता अमित सिंह ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि 16 अप्रैल को जब वह कटघोरा जा रहे थे तब भी उन्होंने इस जंगल में आग लगा देखा, वही 18 अप्रैल को फिर से बांसबाड़ी के जंगलों में भीषण आग देखी जिसकी सूचना उन्होंने अधिकारियों को दी अमित सिंह ने बताया कि 18 तारीख को उन्होंने दो लोगों को मुंह पर कपड़ा बांधकर बांसबाड़ी में आग लगाते देखा । उनका कहना था कि वन विभाग के कर्मचारी आग बुझाने का काम करते थे फिर यह कौन लोग हैं जो जंगल में आग लग रहे हैं क्या वाकई में जंगल में आग लगाई गई है अगर लगाई गई है तो यह किसी बड़ी साजिश कहीं जा सकती है। क्योंकि पहले लोग जंगल में आग लगाते हैं फिर उसी खाली पड़े जगह पर कब्जा कर लेते हैं इसमें कहीं ना कहीं वन विभाग के कर्मचारियों की भी मिली भगत रहती है आशंका तो यह भी है कि विभाग के कर्मचारी बांस के पौधों में आग लगा देते हैं ताकि पौधे सूख जाए और उन्हें काटकर बेचा जा सके पुलिस प्रशासन के साथ-साथ वन विभाग को भी चाहिए कि इस प्रकार की आगजनी की जांच की जाए और दोषियों लोगों पर कार्रवाई करें और जंगलों में हो रहे बेजा कब्जे को रोक जा सके ।
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