कोरबा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने किया वृद्धा के घुटनों का किया सफल प्रत्यारोपण, राज्य का बना दूसरा अस्पताल…..

Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN  korba मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने वह करिश्मा कर दिखाया, जिसकी उम्मीद किसी को नही थी। उन्होंने सीमित संसाधन के बीच लगभग ढाई घंटे के आपरेशन के बाद वृद्धा के घुटने को बदल डाला, जिससे खुद को लाचार महसूस करने वाली वृद्धा चलने-फिरने के काबिल हो गई है। यह कामयाबी गरीब तपके के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नही है। खास बात तो यह है कि राजधानी के बाद कोरबा का मेडिकल कॉलेज घुटना प्रत्यारोपण करने वाला दूसरा चिकित्सालय बन गया है।

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बताया जा रहा हैं की बालको क्षेत्र में लक्ष्मीन बाई नामक 60 वर्षीय महिला परिवार के साथ निवास करती है। वह लंबे अर्से से घुटने के दर्द से जुझ रही थी। परिजनों ने कई स्थानों पर घुटने का उपचार कराया, लेकिन परेशानी कम नही हुई। धीरे-धीरे वृद्धा को चलने-फिरने में भी तकलीफ होने लगी। उसकी बढ़ती परेशानी देख बीते दिनो इलाज के लिए परिजन मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले आए। जहां परिजनों की मुलाकात अस्थि रोग वशिषज्ञ डॉ. घनश्याम दिवान से हुई। उन्होंने वृद्धा के घुटने का बारिकी से निरीक्षण किया। इसके लिए एक्स-रे सहित कुछ अन्य जांच भी कराए गए। इस दौरान पता चला कि उसके दोनों पैर का घुटना पूरी तरह छतिग्रस्त हो चुके है। जिसका एकमात्र उपचार घुटना प्रत्यारोपण है जिसका खर्च महज पांच रूपया है।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. घनश्याम दिवान ने बताया कि घुटना प्रत्यारोपण बेहद ही जटित उपचार है। इस पर निजी अस्पताल में करीब तीन लाख रूपए तक खर्च आ सकता है, जबकि महिला के दाहिने पैर का घुटना प्रत्यारोपण महज पांच रूपए में किया गया है। इस तरह के उपचार आने वाले दिनों में भी किए जाऐंगे।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अस्थि रोग विशेषज्ञ और उनकी टीम ने घुटने का सफल प्रत्यारोपण किया। संभवतः रायपुर के बाद कोरबा मेडिकल कॉलेज घुटना प्रत्यारोपण करने वाला दूसरा अस्पताल है। इससे पहले कुल्हा प्रत्यारोपण भी किया गया है। घुटने का सफल प्रत्यारोपण होने के बाद वृद्धा को चलने-फिरने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

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