NOW HINDUSTAN कोरबा जिलान्तर्गत करतला ब्लॉक के किसान प्राकृतिक खेती के साथ ही अब फिर से श्री पद्धति से धान की फसल लेने लगे हैं। इस बार 200 एकड़ में फसल लगाने का लक्ष्य है।
इस पद्धति से खेती करने पर लागत भी 60 से 65 प्रतिशत तक कम आता है। मड़वारानी के आसपास 6 गांवों में पहली बार किसान इस पद्धति से धान की फसल लगा रहे हैं। ग्राम पुरेना, कचोरा, खरहरी, बीरतराई, चिचोली, तिलाईभाठा में नाबार्ड का जलग्रहण मिशन चलने से स्टॉपडैम बनाकर बारिश का पानी भी रोक रहे हैं। इससे अब सिंचाई भी हो सकेगी। पहले यहां के किसान मानसून पर ही निर्भर रहते थे। सिंचाई की सुविधा बढ़ने के कारण ही श्री पद्धति से खेती कर रहे हैं। इससे कतार बोनी भी कहते हैं।
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ग्राम पुरैना के रामानुज गभेल ने बताया कि मैं पहली बार 5 एकड़ में श्री पद्धति से धान की फसल ले रहा हूं। इसके अलावा बाकी किसान भी अब धान लगा रहे हैं। सामान्य खेती में एकड़ में लागत 10 से 12 हजार तक पहुंच जाती है। लेकिन श्रीपद्धति में लागत 3 से 4 हजार तक होती है। इसमें बीज भी कम लगता है। एकड़ में मात्र 4 किलो बीज की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा खाद और कीटनाशक दवा किसान स्वयं ही बनाते हैं। रासायनिक खाद का उपयोग बहुत कम करते हैं। कृष्णा बिंझवार ने बताया कि किसानों में इस बार अच्छा उत्साह है। सभी किसान मिलकर खेती कर रहे हैं। ग्राम रामपुर, नोनबिर्रा, ढोगदहरा और जोगीपाली क्षेत्र में भी किसान श्री पद्धति से धान की फसल ले रहे हैं।
25 फीसदी आ रही लागत
ग्राम पुरेना निवासी किसान रामानुज गभेल ने बताया कि सामान्य खेती जब करते थे तब लागत अधिक आई थी। इस बार श्री पद्धति से धान लगाने पर 25 प्रतिशत ही लागत आई है। मजदूर भी कम लगे हैं। पहले 50 मजदूर जो काम करते थे उसे 15 लोगों ने किया है।

