2 इकाइयां उत्पादन से हुई बाहर, इनमें एचटीपीपी व डीएसपीएम पॉवर प्लांट की 1-1 इकाई, बंद 3 इकाइयां लाइटअप , 1200 मेगावाट बिजली की बढ़ी मांग…….

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN korba राज्य बिजली उत्पादन कंपनी की तीन बंद इकाईयों का लाइटअप कर दिया गया। इसके बाद से इन इकाईयों पर धीरे-धीरे लोड बढ़ाया गया। अब एचटीपीपी संयंत्र की 210 मेगावाट की दो और डीएसपीएम पॉवर प्लांट की एक इकाई उत्पादन में आ गई है। हालांकि अभी भी कंपनी की कुल क्षमता से 460 मेगावाट कम उत्पादन हो रहा है। इसका कारण एचटीपीपी की 210 मेगावाट और डीएसपीएम पॉवर प्लांट की 250 मेगावाट की बिजली इकाई का उत्पादन से बाहर होना है।
कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता 2840 मेगावाट है।

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इसमें 1340 मेगावाट एचटीपीपी, 1000 मेगावाट का मड़वा पॉवर प्लांट और 500 मेगावाट क्षमता का डीएसपीएम पॉवर प्लांट है। बारिश थमने पर प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 5000 मेगावाट तक जा पहुंची है। जबकि दो दिन पहले 3500 मेगावाट के करीब बिजली की अधिकतम डिमांड रही। अब 1200 मेगावाट बिजली की डिमांड बढ़ गई है। उत्पादन कंपनी की डीएससीएम व एचटीपीपी की एक-एक इकाई जरूरी रख-रखाव के लिए बंद होने से 460 मेगावाट उत्पादन बाधित है। बिजली की डिमांड 5000 मेगावाट से अधिक बढ़ने पर अनशेड्यूल बिजली लेने की नौबत आ सकती है। हालांकि बिजली की मांग बढ़ने के बीच उत्पादन कंपनी की तीन इकाईयों के लाइटअप के बाद अब उत्पादन होने से राहत जरूर है। लेकिन आगे दो अन्य बंद इकाईयों के चालू होने पर सेंट्रल सेक्टर की बिजली पर निर्भरता कम होगी।

6 हजार टन कोयले की बढ़ गई खपत

1340 मेगावाट क्षमता की एचटीपीपी पॉवर प्लांट में 210 मेगावाट की चार इकाई और पहले चरण के विस्तार से 500 मेगावाट की इकाई है। दो बंद इकाईयों के उत्पादन में आने से अब कोयले की खपत 17 हजार र टन रोजाना की है। इसके पहले दोनों इकाईयों के बंद होने से 11 हजार टन कोयले की खपत हो रही थी। 20 हजार टन कोयला खदान से संयंत्र को मिल रहा है। कोयले की आपूर्ति बढ़ाने को कहा गया है क्योंकि 210 मेगावाट की बंद दो नंबर इकाई के उत्पादन में आने पर कोयले की खपत बढ़ जाएगी।

संयंत्र विस्तार से 1980 मेगावाट तक बढ़ेगी क्षमता

बढ़ते औद्योगिक विकास से अगले 5 वर्षों में प्रदेश में 8000 मेगाबाट तक बिजली की मांग रहने का अनुमान है। अभी 6000 मेगावाट बिजली की अधिकतम मांग है। साल-दर-साल बिजली की बढ़ती मांग के मद्देनजर मड़वा प्लांट के विस्तार से 660 मेगावाट और एचटीपीपी प्लांट के दूसरे चरण के विस्तार से 660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल यूनिट लगाने का है। इस तरह दो संयंत्रों के विस्तार से उत्पादन कंपनी की 1980 मेगावाट तक बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने का है।

17000 टन कोयले की खपत : सीई

एचटीपीपी कोरबा-पश्चिम संयंत्र के प्रभारी मुख्म अभियंता पी.के. स्वेन ने बताया कि पॉवर प्लांट में 17000 टन कोयले की खपत हो रही है। दो इकाईयों के चालू होने से 6000 टन तक कोयले की खपत बढ़ी है। 15 अगस्त के बाद एक अन्य बंद इकाई का लाइटअप कर लेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए कोयले की आपूर्ति बढ़ाने एसईसीएल प्रबंधन को कहा है। 20,000 टन कोयला आपूर्ति की जा रही है।

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