कोरबा महापौर की कुर्सी खतरे में, छानबीन समिति ने निरस्त किया जाति प्रमाण पत्र……

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. कोरबा नगर पालिक निगम के महापौर राजकिशोर प्रसाद के जाति प्रमाण पत्र को गहन छानबीन के पश्चात राज्य के उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा निरस्त कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार इस संबंध में उनके खिलाफ भाजपा की तेज तर्रार ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र निगम पार्षद ऋतु चौरसिया ने मुकदमा दायर किया था। इस निर्णय को आने में यद्यपि कुछ समय जरूर लगा, लेकिन अब की स्थिति में समिति द्वारा महापौर राजकिशोर प्रसाद के प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया गया है। इस समिति के अध्यक्ष आदिम जाति विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा हैं।
बताया जा रहा हैं की नगर निगम महापौर राजकिशोर प्रसाद ने अपनी जाति को अपने गृह राज्य बिहार में पिछड़ा वर्ग की पात्रता दर्शा कर कोरबा से भी यह प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया था। इसी आधार पर उन्होंने नगर निगम कोरबा के लिए कांग्रेस से पार्षद का चुनाव भी लड़ा और फिर महापौर बनने में भी सफल हो गए।
जाति संबंधी मामले को लेकर इनके विरुद्ध भाजपा ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र निगम पार्षद ऋतु चौरसिया ने मुकदमा दायर किया था। बहरहाल, इस निर्णय के आने के बाद भाजपा पार्षदों और कार्यकर्ताओं में हर्ष की लहर दौड़ गई है।

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राजकिशोर प्रसाद मेयर रहेंगे या हटेंगे ? जाति प्रमाण पत्र निरस्त के बाद क्या होगा एसडीएम का ……

कोरबा नगर पालिक निगम के महापौर राजकिशोर प्रसाद के जाति प्रमाण पत्र को आदिम जाति विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने निरस्त कर दिया है। यह कार्यवाही पश्चात अब यक्ष सवाल यह हैं कि उस समय पदस्थ एसडीएम ने स्थायी प्रमाण पत्र जारी कैसे कर दिया ? निरस्त करने के बाद अब उन पर किस तरह की कार्यवाही शासन के द्वारा की जाएगी ? क्योंकि उन्होंने गलत प्रमाण पत्र जारी किया और इसमें शामिल सम्बंधित कर्मियों की भी भूमिका जांची जानी चाहिए।

राजनीति के गलियारे में मची खलबली

कांग्रेस के नगर निगम महापौर का जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर देने के बाद शहर की राजनीति में खलबली मच गई है। नगर निगम का चुनाव होने में अभी लगभग 5 माह का वक्त है और इससे पहले प्रमाण पत्र निरस्त कर देने के बाद अब सवाल यह उठ गया है कि क्या इसके आधार पर राजकिशोर प्रसाद आगामी 5 महीने तक महापौर रह पाएंगे ? अभी उनका रुख स्पष्ट नहीं हो सका है।
दूसरी तरफ भाजपा अब पूरा जोर लगा रही है कि महापौर को कुर्सी से हटाया जाए और उनकी जगह भाजपा से ही महापौर मनोनीत किया जाए लेकिन इसमें भी काफी वैधानिक-संवैधानिक पेंच है, जिसको पूरा करते तक कम से कम 2 से 3 माह का वक्त तो लग ही सकता है।

अब जो भी मनोनीत महापौर होगा वह दो से ढाई माह का ही माना जा सकता है। वैसे मनोनीत महापौर बिठाना भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा अगर भाजपा नेताओं में होड़ मच गई। यह भी हो सकता है कि श्री प्रसाद को सदभावना पूर्वक निगम चुनाव की आचार संहिता लागू होने तक महापौर रहने ही दिया जाए।

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