NOW HINDUSTAN. कोरबा-पश्चिम के एसईसीएल क्षेत्र सुभाष ब्लॉक और ड्रिलिंग कैंप कॉलोनी सहित अन्य कॉलोनियों में भी इस बरसात के मौसम में कर्मचारी एवं उनके परिजन डेंगू एवं मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं। इसकी मुख्य वजह आसपास इधर-उधर फैली गंदगी को बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार पुरी कॉलोनी में गंदगी का आलम है। यह कचरा या गंदगी ड्रिलिंग कैंप आवासीय परिसर के उस मार्ग में भी हैं, जिस मार्ग से डीएवी, आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल और शासकीय स्कूलों के बच्चों के अलावा कॉलोनी के कर्मचारी व उनके परिवार के लोगों का हमेशा आना जाना होता है।
- Advertisement -
संबंधित विभाग की निष्क्रियता के कारण संबंधित सफाई ठेकेदार 2-3 माह तक या इससे भी ज्यादा सफाई का कार्य नहीं करवाते है, जबकि ठेकेदार को नियमित कचरा उठाने का टेंडर जारी किया जाता है। आलम ये है कि वर्तमान में कॉलोनी की साफ-सफाई या उनसे जुड़ी समस्याओं को देखने वाला कोई नहीं है। ठेकेदार को प्रबंधन का कोई भय नहीं है। लिहाजा यहां सवाल उठना लाजिमी है कि प्रबंधन को ठेकेदार का भय क्यों नहीं है। वहीं कर्मचारी प्रबंधन के डर से अपनी बात को या समस्या को रख पाने में असहज महसूस करते हैं। कॉलोनी में रहना मजबूरी सी बन गई है।
इसके अलावा कॉलोनी के अंदर आवारा कुत्तों की जनसंख्या इतनी ज्यादा हो गई है कि वे कभी भी किसी बच्चे या राहगीरों को काटकर घायल कर देते हैं। कॉलोनीवासियों की सुरक्षा का ध्यान रखने वाला कोई नहीं है। प्रबंधन सिर्फ साफ-सफाई पखवाड़ा या स्वच्छता पखवाड़ा मना कर स्लोगन पर अपनी साफ सफाई का संदेश मात्र दे रहा है।
एसईसीएल के अधीकारियों की कॉलोनी की सफाई हो जाने से ऐसा प्रतीत होता है मानों पूरा कॉलोनी साफ-सुथरा है। जबकि सामान्य कर्मचारियों की कालोनियों में कूड़ा करकट महीनों तक पड़ा रहता है।
जताया जा रहा हैं की अगर कॉलोनी की साफ-सफाई पर प्रबंधन ध्यान नहीं देते हैं तो आने वाले समय में भारी तादाद में कर्मचारी एवं कर्मचारियों के परिजनों के डेंगू, मलेरिया या अन्य गंभीर बीमारियों की चपेट में आने की पूरी आशंका है।
कॉलोनीवासियों की शिकायत पर वार्ड पार्षद शैलेंद्र सिंह ने एसईसीएल मुख्य महाप्रबंधक को पत्र लिखते हुए संबंधित विभाग के लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों पर उचित कार्यवाही करते हुए कॉलोनी की साफ-सफाई की व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने मांग की है।

