ग्रामीणों ने जुगाड़ से बना डाला देसी पूल, जिला मुख्यालय से केवल 20 किलोमीटर दूर है गांव, गांव में आने -जाने का नहीं था रास्ता…..

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN korba .. प्रशासन की लगातार अनदेखी के शिकार गांव के लोगों ने अपनी समस्या का खुद समाधान कर लिया है।  गांव के नाले पर पुल नहीं होने से परेशान ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार इससे अवगत कराया, लेकिन उस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया. अब ग्रामीणों ने खुद मिलकर पुल बना दिया है। बांस-बल्ली से बने इस पुल से ग्रामीण आवागमन कर रहे हैं,

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मामला जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर दूर चुइया पंचायत का मुढ़धोवा गांव का है जो बारिश में टापू बन जाता है। चारो तरफ से नालों से घिरे इस गांव में आज तक पुल नही बना। सिस्टम की बेरूखी के कारण कुछ दिन पहले एक महिला को अपनी जान गवानी पड़ गई। बताया जा रहा है कि नाले उफान पर थे जिसके कारण गांव में एंबुलेंस आ पाया और ना ये लोग गांव से बाहर निकल पाए। इलाज के अभाव में महिला की मौत हो गई। बारिश के कारण कोई और बेमौत ना मारे इसके लिए लोगो ने लकड़ी का पुलिया बना डाला।

ग्रामीणों ने बताया कि इलाज नहीं मिलने की वजह से पिछले कई सालो में गांव में कई मौतें हो चुकी है। मगर इस बात से ना प्रशासनिक अफसरों को फर्क पड़ा और ना ही गांव को गोद लेने वाले बालको मैनेजमेंट ने कोई पहल की। सरकारी उपेक्षा से निराश लोगो ने नाले पर खुद ही पुलिया बनाने की ठानी और श्रमदान कर चट्टानों के बीच लकड़ी का पुल बना डाला। कम से कम इस बारिश में अब किसी की जान नही जाएगी। बच्चे स्कूल जा सकेंगे।

जानकारी के लिए बता दें कि गांव से ही लगा परसाखोला वाटर फॉल है जिसका लुत्फ उठाने राजनेता, प्रशासनिक अधिकारी और बालको मैनेजमेंट के अधिकारी पहुंचते है। मगर उनके पास इसी नाले के उस पार रहने वाले लाचार आदिवासियों की पीड़ा जानने का वक्त नहीं है। लोगो ने भी मदद के लिए अब सरकार का मुंह ताकना बन कर दिया है। अपनो को किसी अप्रिय घटना से बचाने के लिए लोगो ने लकड़ी का पुलिया बना डाला। आदिवासियों की ये पहल सरकार और प्रशासनिक अफसरों के मुंह में तमाचा से कम नहीं है।

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