एनएसयूआई ज़िला कोरबा ने 20-25 साल से पीजी कॉलेज कोरबा में जमे शिक्षकों उपनगरीय क्षेत्रों में ट्रांसफ़र की माँग…!
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NOW HINDUSTAN korba. एनएसयूआई ज़िला कोरबा द्वारा एनएसयूआई ज़िला उपाध्यक्ष जुनैद मेमन के नेतृत्व में एव युवा कांग्रेस महामंत्री मधुसूदन दास के उपस्थिति में बाँकी मोंगरा,उमरेली,जटगा और अन्य महाविद्यालयों में पीजी कॉलेज कोरबा में पदस्थ 20-25 साल से जमे अनुभवी एव नियमित प्रोफ़ेसरों की स्थान्तरण करने की माँग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम का पत्र अपर कलेक्टर को सौपा एव जल्द से जल्द कार्यवाही की माँग की गई…!
इस अवसर पर युवा कांग्रेस महामंत्री मधुसूदन दास ने कहा की – हमारे द्वारा देखा गया है की कांग्रेस के सरकार के समय कॉलेज का छात्र छात्राओं को ज़्यादा दूर न जाना पड़े बोलकर नज़दीक में महाविद्यालय खोला गया था जिसमें बाँकी मोंगरा,जटगा,उमरेली अन्य थे तत्कालीन वयवस्था के तौर पर संविदा टीचर रखे है परंतु अब उन्हीं से कार्य चलाने की कोसिश की जा रही है जबकि पीजी कॉलेज कोरबाँ में पदस्थ प्रोफ़ेसर जिनको लगभग 20-25 साल हो गये है यहाँ पोस्टिंग पर उन सभी प्रोफ़ेसरों कि तत्काल प्रभाव से उपनगरीय क्षेत्रों के कालेजो में किया जाये ताकि वहा के शिक्षा व्यवस्था में सुधार आ सके…!

इस अवसर पर एनएसयूआई उपाध्यक्ष जुनैद मेमन ने कहा की – पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और अधिक से अधिक छात्रों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए कोरबा जिले के ही उमरेली, रामपुर और बांकीमोंगरा जैसे उपनगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में नवीन महाविद्यालय की स्थापना की थी। शहर में स्वामी आत्मानंद आदर्श महाविद्यालय और बंजारी में आदर्श महाविद्यालय भी संचालित है। इनमें से आत्मानंद और बंजारी सहित 3 कॉलेज का संचालन अकेले पीजी कॉलेज से किया जाता है।
इसके अलावा भी छत्तीसगढ़ में कई ऐसे स्थान हैं। जहां नवीन महाविद्यालय खोले गए हैं। लेकिन खेद का विषय है कि नवीन महाविद्यालयों का शैक्षणिक कार्य पूरी तरह से क्लर्क और अतिथि व्याख्याताओं के भरोसे चल रहा है। शिक्षा में गुणवत्ता का घोर अभाव है। शासकीय नवीन महाविद्यालय, जटगा इसका उपयुक्त उदाहरण है, जहां 4 साल बाद भी यहां ना तो नियमित स्टाफ की नियुक्ति हुई, ना ही इस कॉलेज को अपनी बिल्डिंग मिली है। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या ग्रामीण अंचल के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार नहीं है।
जबकि दूसरी तरफ कोरबा शहर के बीचोबीच स्थित शासकीय ईवीपीजी अग्रणी महाविद्यालय में प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापकों की बड़ी संख्या में पदस्थापना है।
जो इसी महाविद्यालय में 20 से 25 साल से लगातार जमे हुए हैं। नियमानुसार प्रत्येक तीन से चार वर्ष में इनका स्थानांतरण किया जाना चाहिए। लेकिन अपने रसूख और राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाकर यहां पदस्थ प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक एक ही स्थान पर लंबे समय से जमे हुए हैं। जिनका स्थानांतरण होता भी है, तब वह अपनी पहुंच का फायदा उठाकर वापस इसी कॉलेज में चले जाते हैं। जो कि नियमों के विरुद्ध है।

महोदय से निवेदन है कि नवीन महाविद्यालय जटगा, बंजारी और आत्मानंद जैसे कॉलेजों की स्थापना उच्च शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए की गई थी। वर्तमान में यहां मौजूद अतिथि व्याख्याताओं का ज्ञान उतना नहीं है, जितना की वरिष्ठ प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापकों के पास होता है। इसलिए पीजी कॉलेज में ऐसे विद्वान प्राध्यापकों का चिन्हांकन किया जाए, जो लंबे समय से यहां पदस्थ हैं, और इन्हें नवीन महाविद्यालयों में स्थानांतरित किया जाए। ताकि नवीन महाविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों को विद्वान प्राध्यापकों के ज्ञान का लाभ मिल सके और उनका भविष्य बन सके। एक ही स्थान पर अधिक समय तक जमे रहने के कारण पीजी कॉलेज की व्यवस्था भी चरमरा गई है, अराजकता का माहौल है। प्राध्यापक ना तो समय से आते हैं, ना तो अध्यापन कार्य में ही रुचि लेते हैं। ऐसे में यह बेहद आवश्यक है कि पीजी कॉलेज के प्राध्यापकों का स्थानांतरण प्रदेश के ऐसे नवीन महाविद्यालयों में किया जाए, जहां प्राध्यापकों की आवश्यकता है और लगातार कमी बनी हुई है।
हम आशा करते हैं कि छात्रहित को सर्वोपरी रखते हुए आप उचित निर्णय लेंगे और आने वाले समय में प्राध्यापकों को चिन्हित करके नवीन महाविद्यालयों में भेजने की माँग को लेकर पत्र सौपा गया…!
इस अवसर पर प्रमुखरूप से एनएसयूआई ब्लॉक अध्यक्ष धनंजय राठौर,आरटीआई कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष आकाश पटेल,ब्लॉक अध्यक्ष बबलू मारवा,अंकित कुमार,पप्पू,और अनेक एनएसयूआई के साथी उपस्थित थे…!

