प्रतिबंध के बीच बांगो बांध में हो रहा मछली तस्करी का खेल! ठेकेदार–बिचौलियों की मिलीभगत के आरोप, विभाग पर उठे सवाल…….

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. जिले के हसदेव बांगो बांध के ऐतमानगर, सरभोका और बुका क्षेत्र में मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध के बावजूद बड़े पैमाने पर अवैध रूप से मछलियां पकड़े जाने और उनकी खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शासन के स्पष्ट प्रतिबंध के बाद भी बांध में सुबह से शाम तक नाव और जाल के सहारे खुलेआम मछलियां पकड़ी जा रही हैं। पूरे मामले में ठेकेदार, बिचौलियों और जिम्मेदार विभाग के बीच मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

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शासन ने मछलियों के प्रजनन काल को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से 15 जून से 15 अगस्त तक जलाशयों में मत्स्य आखेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। इसके बावजूद ग्रामीणों का दावा है कि प्रतिदिन 50 से 70 मछुआरे बांध में उतरकर 10 क्विंटल से अधिक मछलियां पकड़ रहे हैं। आरोप है कि पकड़ी गई मछलियों को मौके पर ही कुछ बिचौलिए खरीद लेते हैं, जो स्वयं को डेम के ठेकेदार और अधिकारी से जुड़ा बताते हैं और बाद में इन्हें विभिन्न बाजारों में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है।स्थानीय लोगों के अनुसार, इस अवैध कारोबार का आकार इतना बड़ा है कि प्रतिदिन 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य की मछलियां बाजार में बेची जा रही हैं। यदि यह सिलसिला लंबे समय से जारी है तो अब तक करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर शासन मत्स्य संरक्षण के लिए प्रतिबंध लागू कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसी अवधि में खुलेआम मछली पकड़ने का खेल जारी है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जिम्मेदार विभाग की निगरानी व्यवस्था कहां है। लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लगातार गतिविधियां होने के बावजूद न तो नियमित गश्त दिखाई दे रही है और न ही किसी बड़ी कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और कथित मिलीभगत को लेकर संदेह गहराता जा रहा है। विडंबना यह है कि जिस समय मत्स्य विभाग जलाशय में मत्स्य बीज (फिश सीड) संचयन कर मत्स्य संसाधनों को बढ़ाने का दावा कर रहा है, उसी दौरान प्रतिबंधित अवधि में बड़े पैमाने पर मछलियां निकाले जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। मानना है कि यदि प्रजनन काल में इसी तरह अवैध मत्स्य आखेट जारी रहा तो भविष्य में जलाशय की मत्स्य संपदा पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

मामले में मत्स्य निरीक्षक कमल किशोर से संपर्क किए जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें प्रतिबंध अवधि में मछली पकड़े जाने की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विभाग द्वारा जलाशय में मत्स्य बीज संचयन का कार्य कराया जा रहा है। यदि अवैध मत्स्य आखेट की शिकायत प्राप्त होती है तो मौके की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इधर, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, प्रतिबंध अवधि में विशेष निगरानी दल गठित करने, नियमित गश्त बढ़ाने तथा अवैध मत्स्य आखेट और खरीद-फरोख्त में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो शासन का प्रतिबंध केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा और हसदेव बांगो बांध की बहुमूल्य मत्स्य संपदा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

नोट: समाचार में प्रतिदिन 50 से 70 अधिक मछुआरों द्वारा 10 क्विंटल से अधिक मछली पकड़ने तथा 10 लाख रुपये से अधिक के अवैध कारोबार जैसे दावे स्थानीय लोगों के आरोपों पर आधारित हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा नहीं की गई है।

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