मुआवजा, पुनर्वास एवं रोजगार से वंचित सभी परिवारों को न्याय मिले, तभी 21 अगस्त की जनसुनवाई संभव।
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ग्रामीणों की उपेक्षा जारी रही तो जनसुनवाई का पुरजोर विरोध होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।
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NOW HINDUSTAN. कोरबा, सोमवार को भिलाई खुर्द क्रमांक-1, 2 एवं 3, बरबसपुर, कर्रानाला, कदमहाखार, इमलीडुग्गू, रापाखर्रा, मानिकपुर, दादर खुर्द, ढेलवाडीह तथा कुदरी बस्ती सहित आसपास के अनेक गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से भेंट कर अपनी गंभीर समस्याओं से अवगत कराया।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पूर्व में अपनी मांगों के संबंध में जयसिंह अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा था, जिसके आधार पर श्री अग्रवाल ने एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि 21 अगस्त 2026 को प्रस्तावित मानिकपुर खदान विस्तार परियोजना की जनसुनवाई से पूर्व प्रभावित ग्रामीणों की सभी प्रमुख समस्याओं एवं मांगों का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। किंतु अत्यंत खेद का विषय है कि आज तक एसईसीएल प्रबंधन द्वारा इस दिशा में कोई ठोस एवं संतोषजनक पहल नहीं की गई है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि मुआवजे से वंचित सभी मकानों एवं परिवारों को सूची में शामिल किए बिना, पुनर्वास एवं रोजगार संबंधी लंबित मामलों का समाधान किए बिना तथा प्रभावित परिवारों को न्याय दिए बिना वे किसी भी स्थिति में जनसुनवाई का समर्थन नहीं करेंगे। यदि उनकी न्यायोचित मांगों की लगातार अनदेखी की जाती रही तो समस्त प्रभावित ग्रामीण एकजुट होकर प्रस्तावित जनसुनवाई का सशक्त विरोध करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।
ग्रामीणों ने यह भी जानकारी दी कि वे शीघ्र ही अपनी मांगों एवं आपत्तियों से संबंधित विस्तृत ज्ञापन कलेक्टर कोरबा को सौंपेंगे, जिसकी प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक कोरबा, महाप्रबंधक (मानिकपुर क्षेत्र) तथा मुख्य महाप्रबंधक, एसईसीएल कोरबा को भी प्रेषित की जाएगी।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनकी मांगें पूरी तरह न्यायसंगत एवं वास्तविक हैं। किसी भी विकास परियोजना का उद्देश्य प्रभावित लोगों के अधिकारों का हनन करना नहीं हो सकता। जब तक प्रभावित परिवारों को उनका वैधानिक मुआवजा, समुचित पुनर्वास तथा रोजगार संबंधी अधिकार सुनिश्चित नहीं किए जाते, तब तक परियोजना को आगे बढ़ाना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
श्री अग्रवाल ने कहा कि एसईसीएल प्रबंधन को जनसुनवाई से पूर्व सभी लंबित मामलों का पारदर्शी एवं समयबद्ध निराकरण करना चाहिए। यदि प्रबंधन ऐसा करने में विफल रहता है और इसके कारण जनसुनवाई में विरोध की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी स्वयं एसईसीएल प्रबंधन की होगी।
अंत में जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि वे प्रभावित ग्रामीणों के साथ पहले भी खड़े थे, आज भी उनके साथ हैं और भविष्य में भी उनके न्यायपूर्ण अधिकारों की लड़ाई में हर स्तर पर पूरा सहयोग एवं समर्थन देते रहेंगे।
