शासकीय भूमि पर कब्जा,जांच टीम बनी लेकिन कार्रवाई नहीं! आखिर जिम्मेदार कौन?

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
3 Min Read

 

- Advertisement -

क्या कोरबा जिले में अब सरकारी भूमि भी सुरक्षित नहीं?

पशु चिकित्सालय की जमीन बचाने की गुहार के बाद भी प्रशासनिक टीम मौके पर नहीं पहुंची, कार्रवाई पर उठे सवाल।

NOW HINDUSTAN कोरबा/बरपाली। कोरबा जिले के बरपाली स्थित शासकीय पशु चिकित्सालय की सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण और खेती किए जाने के मामले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दस्तावेज़ों से स्पष्ट होता है कि शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने जांच के लिए टीम भी गठित कर दी, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार आज तक जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे और न ही प्रभावी कार्रवाई दिखाई दी।

उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार, 17 जुलाई 2026 को शासकीय पशु चिकित्सालय बरपाली के प्रभारी ने ग्राम पंचायत सरपंच को पत्र लिखकर बताया कि खसरा नंबर 113/1 की शासकीय भूमि पर बने नए पशु चिकित्सालय परिसर के आसपास कुछ लोगों द्वारा खेती की जा रही है। पत्र में यह भी उल्लेख है कि इससे भवन की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और सरकारी भूमि को तत्काल अतिक्रमण से मुक्त कराने का अनुरोध किया गया।

इसके बाद 27 जुलाई 2026 को तहसीलदार बरपाली ने आदेश जारी कर राजस्व निरीक्षक एवं कई पटवारियों की 10 सदस्यीय जांच टीम गठित की और तीन दिनों के भीतर स्थल निरीक्षण, राजस्व अभिलेखों के मिलान, पंचनामा, खसरा और नक्शे सहित विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि—

जब टीम का गठन हो गया था, तो क्या स्थल निरीक्षण समय पर किया गया?
यदि नहीं, तो आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ?
तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश के बावजूद रिपोर्ट कहां है?
क्या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी?
यदि सरकारी भूमि पर वास्तव में अतिक्रमण है, तो उसे हटाने में देरी क्यों?
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि अतिक्रमण हुआ है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय सक्षम राजस्व प्राधिकारी की जांच और अभिलेखों के आधार पर ही होगा। लेकिन यदि जांच के आदेश के बावजूद कार्रवाई लंबित रही है, तो यह प्रशासनिक उत्तरदायित्व पर गंभीर प्रश्न अवश्य खड़े करता है।

सरकारी संपत्ति की सुरक्षा केवल कागजी आदेशों से नहीं, बल्कि समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई से सुनिश्चित होती है। यदि आदेश जारी होने के बाद भी कार्रवाई धरातल पर दिखाई नहीं देती, तो स्वाभाविक रूप से जनता के मन में प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर प्रश्न उठते हैं।

Share this Article