​काल के गाल में समाने से बचा एक शरारती तत्व, हाथियों के हमले से बाल-बाल बची जान…..

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN korba. कुदमूरा वन परिक्षेत्र (वन मंडल कोरबा) अंतर्गत कक्ष क्रमांक OA 1418, बीट जिलगा से लगे हुए ग्राम कलमीटिकरा में वर्तमान में 9 हाथियों (1 नर, 6 मादा और 2 सावक) का दल जंगलों में विचरण कर रहा है। हाथी अपने प्राकृतिक स्वभाव के अनुसार जंगलों में घूम रहे हैं, परंतु कुछ असामाजिक व शरारती तत्वों की गैर-जिम्मेदाराना हरकतों के कारण गंभीर दुर्घटना का अंदेशा बना हुआ है।

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​दिनांक 04 अगस्त 2026 को ग्राम कलमीटिकरा के समीपस्थ जंगल में भारी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। कुछ उपद्रवी व शरारती लोग पेड़ों पर चढ़कर मोबाइल से हाथियों का वीडियो बनाने लगे और अपने प्राणों को पूर्ण रूप से संकट में डाल दिया। इस दौरान एक शरारती तत्व हाथियों के अत्यंत समीप पहुँच गया, जो हमले से बाल-बाल बचा और काल के गाल में समाने से ऐन वक्त पर बच निकला।

ध्यान दें: हाथियों को डराने, हो-हल्ला करने और छेड़ने से उन्हें दीर्घकालिक मानसिक तनाव पहुँचता है। इस प्रवृत्ति से हाथियों में मानवों के प्रति तीव्र रोष उत्पन्न होता है, जो भविष्य में जान-माल की भारी तबाही (कैजुअल्टी) का कारण बनता है। पूर्व में भी रायगढ़ वन मंडल अंतर्गत इस प्रकार की हरकत करने वाले दो ग्रामीणों को जेल दाखिल कराया जा चुका है।

*​वन विभाग द्वारा किए जा रहे सुरक्षा उपाय*

मानव-हाथी द्वंद को रोकने तथा ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए वन विभाग द्वारा निरंतर निम्नलिखित प्रयास किए जा रहे हैं:
*​तकनीकी निगरानी:* थर्मल ड्रोन के माध्यम से हाथियों की मुस्तैद मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग की जा रही है।
*​सचेतक ऐप एवं अलर्ट:* ‘गज संकेत ऐप’ का निरंतर उपयोग और अति-संवेदनशील गाँवों के लिए व्हाट्सएप ग्रुप्स का निर्माण किया गया है, ताकि हाथियों की लोकेशन तुरंत मिल सके।
*​जन-जागरूकता:* ‘हमर हाथी हमर गोठ’ रेडियो प्रसारण तथा समाचार पत्रों के माध्यम से लगातार सतर्कता संदेश जारी किए जा रहे हैं।
*​ग्राउंड टीम व बैरिकेडिंग* : हाथी मित्र दल क्षेत्र में चौबीसों घंटे तैनात है और संवेदनशील मार्गों पर अस्थाई बैरिकेडिंग कर लोगों को अलर्ट किया जा रहा है।
*​वन विभाग कोरबा की अति-आवश्यक अपील*
​तमाम उपायों के बावजूद कुछ लोग मनाही के बाद भी हाथियों को उकसाने का काम कर रहे हैं। वन मंडल कोरबा ने क्षेत्रवासियों एवं जनप्रतिनिधियों से संयम बरतने की अपील करते हुए निम्नलिखित हिदायतें दी हैं:
*​सुरक्षित दूरी बनाए रखें:* हाथियों के समीप बिल्कुल न जाएँ और किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी के चक्कर में अपनी व परिवार की जान जोखिम में न डालें।
​ *प्रतिबंधित कार्यों से बचें:* शराब का सेवन करके या लाल कपड़े पहनकर हाथियों के पास जाना अत्यंत खतरनाक है, ऐसी गलतियाँ बार-बार न दोहराएँ।
​ *प्राकृतिक जीवन में दखल न दें:* वन्य प्राणियों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रहने दें, ताकि वे अपने स्वभाव के अनुसार विचरण कर सकें।
*​चेतावनी:* हाथियों को परेशान करने, उकसाने या वन नियमों का उल्लंघन करने वाले तत्वों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कठोर दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

ग्राम कलमीटिकरा में OA1418 जिलगा परिसर में विचरण कर रहे 9 हाथियों के दल के निकट जाने और उनसे छेड़छाड़ करने के दौरान एक ग्रामीण दुर्घटना का शिकार हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम कलमीटिकरा निवासी किरण कुमार राठिया (पिता: राम सिंह राठिया, उम्र: लगभग 30 वर्ष) हाथियों के दल के अत्यधिक समीप चले गए थे। इस दौरान हाथियों की चपेट में आने से उनके हाथ में चोट आई और वे घायल हो गए।
​घटना के तत्काल बाद शाम लगभग 7:00 बजे घायल ग्रामीण को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, करतला पहुंचाया गया। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने पूरी संवेदनशीलता दिखाते हुए मरीज के त्वरित इलाज की व्यवस्था कराई। इसके साथ ही विभाग द्वारा घायल किरण कुमार राठिया की धर्मपत्नी श्रीमती सविता राठिया को ₹2,000 (दो हजार रुपये) की तात्कालिक सहायता राशि नकद प्रदान की गई।

*​जान जोखिम में न डालें, हाथियों से बनाएं दूरी: वन विभाग की अपील*
​उक्त घटना में ग्रामीण के जीवन के बाल-बाल बचने के बाद, वन विभाग ने क्षेत्र के निवासियों और आसपास के ग्रामीणों से बेहद सतर्क रहने की अपील की है:
*​सुरक्षित दूरी बनाए रखें* : हाथियों के दिखने पर उनके निकट न जाएं और न ही अपने परिवार या बच्चों को जाने दें। किसी भी प्रकार की जोखिमपूर्ण स्थिति निर्मित न करें।
​ *छेड़छाड़ न करें:* हाथियों को उनके प्राकृतिक रहवास में उनके स्वभाव के अनुरूप स्वच्छंद विचरण करने दें। उन्हें उकसाने या छेड़ने का प्रयास बिल्कुल न करें।
*​दूसरे गांवों की सुरक्षा भी आपकी जिम्मेदारी:* हाथियों से छेड़छाड़ करने पर उनका स्वभाव आक्रामक हो जाता है। मानव द्वारा चिढ़ाए जाने पर जब यह दल किसी अन्य या समीपस्थ जंगली ग्रामों में पहुंचता है, तो वहां अप्रिय घटनाएं घटने का खतरा बढ़ जाता है।
*​विशेष संदेश:*
हाथी एक वन्य प्राणी हैं। उन्हें उनके प्राकृतिक रहवास में शांतिपूर्वक रहने दें। आपकी एक छोटी सी लापरवाही न केवल आपके लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र और आसपास के गांवों के लिए घातक साबित हो सकती है। वन विभाग का सहयोग करें और सुरक्षित रहें।”

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