NOW HINDUSTAN. Korba. कोंडागांव/माकड़ी, 7 अगस्त। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर जिला हथकरघा कार्यालय, जगदलपुर से संबंधित चंदेनी बूढ़ी माता बुनकर सहकारी समिति मर्यादित, सलना, जिला कोंडागांव द्वारा 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बुनकरों एवं ग्रामीणों के लिए ‘नवीन बुनाई’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, बुनकर एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम में जिला हथकरघा कार्यालय, जगदलपुर से रमेश कुमार तथा अपैक्स से देवेंद्र नेताम उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बस्तर जिला बुनकर संघ के अध्यक्ष नारायण देवांगन तथा विशिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ के प्रदेश मंत्री सुनील रत्नाकर रहे।
कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के सरपंच दशरथ शोरी, पटेल धनीराम मरकाम एवं अमरू राम मरकाम, गायता रामसाय मरकाम, समिति अध्यक्ष सोमन सिंह पांडे, सचिव कपूरचंद खंडारिया सहित फरसु बघेल, धनेर, खुरसो, विजय, मेघनाथ, बुलाराम, ठढगु राम, समतू, हेमलाल, धन्नाराम, बैजनाथ, घुढराम, अमर सिंह, नोहर राम सोरी सहित अन्य प्रशिक्षणार्थी एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

हथकरघा हमारी संस्कृति, पहचान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत : नारायण देवांगन
मुख्य अतिथि एवं बस्तर जिला बुनकर संघ के अध्यक्ष नारायण देवांगन ने कहा कि हथकरघा केवल कपड़ा तैयार करने का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी परंपरा, संस्कृति, कला और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की पहचान है। यह ऐसा हुनर है, जिसे हमारे पूर्वजों ने अपनी मेहनत, लगन और कौशल से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि आज समय की आवश्यकता है कि पारंपरिक हथकरघा कला को आधुनिक तकनीक, नवीन डिजाइन, नई बुनाई पद्धतियों और बेहतर प्रशिक्षण से जोड़ा जाए। इससे बुनकरों के हुनर को नई दिशा मिलने के साथ-साथ उनके उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
श्री देवांगन ने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि इस प्रशिक्षण को केवल एक कार्यक्रम या अवसर के रूप में न लें, बल्कि इसे अपने भविष्य को मजबूत करने और आजीविका के नए रास्ते खोलने का माध्यम बनाएं। प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाली तकनीक और जानकारी को पूरी गंभीरता, रुचि और लगन के साथ सीखें तथा उसे अपने कार्य में उतारें।
उन्होंने कहा कि बुनकरों की मेहनत और हुनर को आर्थिक रूप से मजबूत करना ही हथकरघा क्षेत्र को आगे बढ़ाने का सबसे प्रभावी रास्ता है। यदि ग्रामीण युवा और बुनकर परिवार आधुनिक डिजाइन एवं तकनीक का प्रशिक्षण लेकर अपने कौशल को निखारें, तो गांव में ही रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी पारंपरिक कला से जुड़ें और उसे आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप विकसित करें। उन्होंने कहा कि हथकरघा कला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना केवल बुनकर परिवारों की नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। पारंपरिक हुनर को बचाते हुए उसे नई पहचान और नई ऊंचाई देना हम सभी का दायित्व है।
चंदेनी बूढ़ी माता बुनकर सहकारी समिति में ‘नवीन बुनाई’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ, ग्रामीणों एवं बुनकरों ने लिया प्रशिक्षण का लाभचंदेनी बूढ़ी माता बुनकर सहकारी समिति में ‘नवीन बुनाई’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ, ग्रामीणों एवं बुनकरों ने लिया प्रशिक्षण का लाभ
विशिष्ट अतिथि एवं छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ के प्रदेश मंत्री सुनील रत्नाकर ने कहा कि ‘नवीन बुनाई’ प्रशिक्षण ग्रामीण एवं बुनकर परिवारों के लिए केवल कौशल सीखने का अवसर नहीं, बल्कि रोजगार, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि प्रशिक्षण को केवल प्रमाण-पत्र प्राप्त करने तक सीमित न रखें, बल्कि सीखे गए हुनर को अपनी आजीविका का साधन बनाएं। उन्होंने कहा कि “मेहनत आपके हाथ में है और हुनर आपकी ताकत है। इसी हुनर को सही प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ दिया जाए तो यही आपकी आर्थिक मजबूती का आधार बन सकता है।”
श्री रत्नाकर ने कहा कि आधुनिक तकनीक एवं नई बुनाई पद्धतियों का प्रशिक्षण लेकर बुनकर अपने उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन और उपयोगिता को बेहतर कर सकते हैं। इससे उनके उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध होने के साथ-साथ परिवार की आय में भी वृद्धि हो सकती है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण और श्रमिक परिवारों के बच्चों एवं युवाओं को ऐसे कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ना आज की आवश्यकता है। शिक्षा के साथ कौशल और कौशल के साथ रोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मजबूत कड़ी है। उन्होंने कहा कि यदि गांव के युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध हों, तो पलायन को कम करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।
श्री रत्नाकर ने प्रशिक्षणार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वे अपनी मेहनत और हुनर पर विश्वास रखें तथा प्रशिक्षण के प्रत्येक अवसर का भरपूर लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि एक प्रशिक्षित हाथ केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति नहीं बदलता, बल्कि पूरे गांव की आर्थिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है।
उन्होंने विशेष रूप से मजदूर एवं ग्रामीण परिवारों के बच्चों और युवाओं से आह्वान किया कि वे पारंपरिक कार्यों के साथ-साथ आधुनिक कौशल भी सीखें, ताकि वे बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों का लाभ उठा सकें।
बुनकर परिवारों को मिलने वाली योजनाओं एवं सुविधाओं की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान जिला हथकरघा कार्यालय, जगदलपुर के श्री रमेश कुमार ने बुनकर परिवारों के लिए उपलब्ध विभिन्न योजनाओं एवं सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से बुनकर परिवारों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, आवास एवं पेंशन सहित विभागीय योजनाओं की जानकारी उपस्थित लोगों को दी तथा पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक प्रक्रिया एवं जानकारी से अवगत कराया।
‘नवीन बुनाई’ प्रशिक्षण को लेकर दिखा उत्साह
कार्यक्रम के दौरान ‘नवीन बुनाई’ प्रशिक्षण को लेकर प्रशिक्षणार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों एवं बुनकरों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे पारंपरिक हथकरघा कला को नई तकनीक से जोड़ने तथा आजीविका के नए अवसर विकसित करने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों एवं प्रशिक्षणार्थियों ने हथकरघा कला को आगे बढ़ाने, नई बुनाई तकनीकों को सीखने तथा प्रशिक्षण के माध्यम से अपने कौशल को विकसित करने का संकल्प लिया।
कुल मिलाकर राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का आयोजन परंपरा के संरक्षण, हुनर के सम्मान, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरणादायी पहल के रूप में सामने आया।इस संस्करण में दोनों अतिथियों के कथनों को अलग-अलग मजबूत संदेश और स्पष्ट भूमिका दी गई है—नारायण देवांगन का वक्तव्य हथकरघा की परंपरा, संस्कृति और बाजार पर तथा सुनील रत्नाकर का वक्तव्य कौशल, रोजगार, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण युवाओं पर केंद्रित रखा गया है।
