NOW HINDUSTAN. कोरबा। जिले के ग्राम खरमोरा के किसान जगत सिंह कुशवाहा के खेत में लगाई गई TCR विक्रम धान किस्म का प्रदर्शन बेहतर फसल प्रबंधन के लिहाज से उल्लेखनीय रहा है। फसल में कीटों की उपस्थिति आर्थिक क्षति स्तर (ETL) से कम रहने के कारण किसान को कीटनाशकों का छिड़काव नहीं करना पड़ा। वहीं, फसल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए फफूंदीनाशक दवाओं के इस्तेमाल की भी आवश्यकता नहीं पड़ी।
इससे खेती की लागत कम रखने में मदद मिली।
धान की खेती में बेहतर उत्पादन के लिए उन्नत किस्म का चयन, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, समय पर कृषि कार्य और कीट-रोगों की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है। वर्तमान समय में खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि आदानों की बढ़ती कीमतों के बीच किसानों के लिए कम लागत में बेहतर फसल प्रबंधन करना बड़ी चुनौती है। ऐसे में किसान जगत सिंह कुशवाहा के खेत का अनुभव आवश्यकता के अनुसार दवाओं के उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
बीज निगम के अधिकारी सी पी मिश्रा ने बताया कि धान का बीज छत्तीसगढ़ के कृषि के केन्द्र में ही उतपन्न किया गया है। और इसे अभी कोरबा के चार जगहों पर लगाया गया है ।
कीटों की निगरानी से अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण
खेत में फसल की स्थिति का अवलोकन करने पर कीटों की उपस्थिति आर्थिक क्षति स्तर से कम पाई गई। ऐसे में कीटनाशकों का अनावश्यक छिड़काव करने के बजाय फसल की निगरानी और स्थिति के अनुसार प्रबंधन पर जोर दिया गया। इससे महंगी कीटनाशक दवाओं पर होने वाले खर्च से बचत हुई।
इसी तरह, फसल में दिखाई देने वाले लक्षणों और वर्तमान स्थिति के आधार पर फफूंदीनाशक दवाओं का छिड़काव आवश्यक नहीं समझा गया। इससे अतिरिक्त लागत से बचने में मदद मिली। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कीटों की संख्या और फसल को होने वाली संभावित क्षति का आकलन करने के बाद ही नियंत्रण के उपाय अपनाना उपयोगी होता है।
कृषि विस्तार अधिकारी संजय पटेल ने धान की किस्म को लेकर जानकारी देते होते हुए बताया कि जिले के किसानों को धान के नए किस्म को अपनाने को लेकर जानकारी दी जा रही है ।
कम लागत और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
फसल में आवश्यकता के अनुसार ही रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल करने से खेती की लागत कम करने के साथ-साथ लाभकारी कीटों और प्राकृतिक शत्रुओं के संरक्षण में भी मदद मिल सकती है। अनावश्यक रासायनिक छिड़काव में कमी से पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को भी कम किया जा सकता है। यह पद्धति एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) की अवधारणा के अनुरूप है।
अन्य किसानों के लिए उपयोगी अनुभव
किसान जगत सिंह कुशवाहा के खेत का यह अनुभव क्षेत्र के अन्य धान उत्पादक किसानों के लिए उपयोगी हो सकता है। इससे यह संदेश मिलता है कि केवल कीट दिखाई देने पर दवाओं का छिड़काव करने के बजाय उनकी संख्या, फसल को होने वाले नुकसान और आर्थिक क्षति स्तर का आकलन करना चाहिए। नियमित खेत निरीक्षण, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, उचित जल प्रबंधन और कृषि विशेषज्ञों की सलाह से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
हालांकि, TCR विक्रम किस्म की रोग प्रतिरोधक क्षमता और प्रतिकूल मौसम सहनशीलता को प्रमाणित करने के लिए वैज्ञानिक परीक्षणों एवं तुलनात्मक अनुसंधान के आंकड़े आवश्यक हैं। फिलहाल खरमोरा के किसान के खेत में सामने आया अनुभव कम लागत वाले फसल प्रबंधन की दृष्टि से उल्लेखनीय है।
