फुटका पहाड़ की राम कचहरी में गूंजे श्रीराम के जयकारे, भजनों पर झूमे श्रद्धालु ऐतिहासिक-धार्मिक स्थल पर नगर निगम का आयोजन, आस्था के बीच मूलभूत सुविधाओं के अभाव का दर्द भी आया सामने……

Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. कोरबा। कभी फुटका पहाड़ से बॉक्साइट निकालकर बालको में एल्युमिनियम का उत्पादन किया जाता था और यहां से निर्मित एल्युमिनियम की चमक देश-विदेश तक पहुंचती थी। आज वही ऐतिहासिक पहाड़ भगवान श्रीराम के जयकारों और भजनों से गुंजायमान हो उठा। फुटका पहाड़ स्थित राम कचहरी में नगर निगम द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम ने इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल के दौरान इस क्षेत्र में वनवासियों के बीच समय बिताया था और उनके दुख-दर्द को साझा किया था। इसी धार्मिक आस्था से जुड़ी राम कचहरी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पहाड़ की प्राकृतिक वादियां रामधुन और भजनों से सराबोर रहीं। आमंत्रित गायक कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

राम कचहरी के आयोजन में हनुनाम अंश के कलाकार  शोभिनव सत्य भी शामिल हुए ।यहां प्रकृति की छटा देखकर भावविभोर होकर कहा कि राम जी चाहेंगे तो वो फिर कोरबा आना चाहेंगे ।

कार्यक्रम में महापौर संजू देवी राजपूत भी शामिल हुईं। इस दौरान वे स्वच्छता दीदियों के साथ नृत्य करती नजर आईं। वहीं, भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के स्वरूप में सजे कलाकार आकर्षण का केंद्र रहे। स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं। आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने पहाड़ की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक वातावरण का आनंद लिया।

पीढ़ियों से आस्था का केंद्र है राम कचहरी

राम कचहरी स्थानीय वनवासी समुदाय के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखती है। यहां पीढ़ियों से पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन की परंपरा चली आ रही है। स्थानीय वनवासियों का कहना है कि उनके पूर्वज भी इस स्थल पर भगवान की आराधना करते रहे हैं और आज भी उनकी पीढ़ियां इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। श्रद्धालुओं के मन में इस स्थान के प्रति गहरी आस्था है। उनका विश्वास है कि यहां उन्हें आध्यात्मिक शांति और सुरक्षा का अनुभव होता है।

आस्था के साथ सुविधाओं की भी दरकार

राम कचहरी में धार्मिक आयोजन ने जहां लोगों की आस्था को नई ऊर्जा दी, वहीं इस स्थल के विकास और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा भी सामने आया। स्थानीय आदिवासियों और स्थल के संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व होने के बावजूद यहां सड़क, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। इसके कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यहां तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि शासन-प्रशासन इस स्थल के ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसके विकास की ठोस योजना तैयार करे। सड़क और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही यहां की प्राकृतिक विरासत और स्थानीय वनवासी समुदाय की धार्मिक परंपराओं का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए।
राम कचहरी में गूंजे श्रीराम के जयकारों ने इस स्थल की धार्मिक पहचान को फिर से सामने ला दिया है। अब देखना यह होगा कि आयोजन के बाद यहां के विकास और सुविधाओं की दिशा में भी ठोस पहल होती है या नहीं।

नगर निगम द्वारा आयोजित इस राम कचहरी में निगम आयुक्त समेत बड़ी संख्या में कोरबा के लोग पहुंचे और कार्यक्रम का आनंद लिया।

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