बालको कर्मचारियों ने दिव्य ज्योति स्कूल में मनाया अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस…..

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. Korba.  वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने दिव्य ज्योति स्कूल में बच्चों के साथ अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस मनाया। स्कूल में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन जागरूकता को बढ़ावा देने और किशोरों को शिक्षित करने के लिए विभिन्न पहल का आयोजन किया गया। कंपनी के समावेशिता और सशक्तिकरण दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के अनुरूप कार्यक्रम में 100 से अधिक दिव्यांग बच्चे और बालको कर्मचारी शामिल हुए।

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बालको ने ‘स्टिच माई ओन पैड’ नामक एक विशेष कार्यक्रम भी संचालित किया। आर्थिक रूप से कमजोर और माहवारी से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करते हुए कंपनी द्वारा संचालित प्रशिक्षण ने अलग-अलग दिव्यांग किशोरियों को अपने स्वयं के पुन: प्रयोज्य कपड़े के पैड सिलने के लिए सशक्त बनाया। इस सत्र में माहवारी से जुड़ी चुनौतियों और भ्रांतियों के बारे में भी चर्चा की गई, जिसका उद्देश्य एक ऐसा सहायक वातावरण बनाना था जो किशोरियों के आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रथाओं को अपनाने के लिए सशक्त बनाए।

दिव्यांग बच्चों को शिक्षित करने के लिए बालको ने माहवारी के बारे में शिक्षा को सशक्त बनाने और सुविधाजनक बनाने के लिए विशेष ब्रेल-आधारित शिक्षण मॉड्यूल भी पेश किए हैं। कंपनी के मॉड्यूल से मूक, श्रवण और दृष्टि बाधित बच्चों और संवेदी चुनौतियों का सामना करने वाले इन सभी को अपनी क्षमताओं पर विश्वास करने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। कार्यक्रम में बच्चों ने सांस्कृतिक प्रदर्शन तथा कर्मचारी ने बच्चों के साथ कहानियाँ साझा कर उन्हें भविष्य में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक  राजेश कुमार ने समावेशिता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि हम अपने कार्यस्थल और साथ ही अपने आस-पास के समुदाय में समावेशिता की संस्कृति बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम व्यक्तियों की अद्वितीय क्षमताओं का जश्न मनाकर और सार्थक बदलाव लाने वाले समान अवसर पैदा करके उन्हें सशक्त बनाने में विश्वास करते हैं। विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से हम बाधाओं को तोड़ने और सभी के लिए अधिक न्यायसंगत भविष्य बनाने की उम्मीद करते हैं।

दिव्यांग बच्चों के साथ अपने अनुभव को साझा करते हुए बालको के सहायक प्रबंधक श्री दीपम नाथ ने कहा कि बालको में स्वयंसेवा करना हमेशा एक प्रेरणादायी अनुभव रहा है। समुदाय के साथ जुड़ना मुझे याद दिलाता है कि योगदान करने का विकल्प कितना बेहतर है। दिव्य ज्योति स्कूल की मेरी यात्रा ने मुझे एक ऐसी दुनिया की झलक दिखाई, जहाँ शारीरिक चुनौतियाँ सीमाएं नहीं हैं बल्कि उनका आत्मविश्वास ही उनकी शक्ति है। संगीत की धुनें न सुन पाने के बावजूद छात्रों द्वारा किया गया नृत्य प्रदर्शन उनके दृढ़ संकल्प और प्रतिभा को दर्शाता है जो वाकई में उन्हें विशेष बनाता है। यह एक प्रेरक अनुभव है जो हमेशा मेरे साथ रहेगा।

एक समान कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता के रूप में बालको विविधता और समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए कई पहल करता है। संवेदीकरण कार्यशालाओं और प्रशिक्षण का आयोजन कर बेहतर कार्यस्थल संस्कृति को बढ़ावा देता है जो समझ और सम्मान पर पनपती है। कंपनी एक समावेशी नियुक्ति दृष्टिकोण अपनाते हुए योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करती है। कंपनी सक्रिय रूप से विविध पृष्ठभूमि, अनुभव और क्षमता युक्त प्रतिभा की तलाश करती है, जिससे विविधता और समावेशन की प्रतिबद्धता मजबूत होती है। कंपनी ने अब तक अपने यहां 18 ट्रांसजेंडर कर्मचारियों और 3 दिव्यांग कर्मचारियों को नियोजित किया है।
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