वेदांता एल्युमीनियम ने कमांड कंट्रोल रूम संचालित करने महिलाओं की टीम करी तैनात
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NOW HINDUSTAN. Korba. भारत के सबसे बड़े एल्युमीनियम उत्पादक, वेदांता एल्युमीनियम ने ओडिशा के लांजीगढ़ स्थित अपने एल्युमिना रिफाइनरी में डिस्ट्रिब्यूटेड कंट्रोल सिस्टम (डीसीएस) का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह महिलाओं की टीम तैनात करने घोषणा की है। 40 प्रशिक्षित महिला पेशेवरों का यह समूह अब रिफाइनरी के नर्व सेंटर को संचालित करेगा, जो संयंत्र संचालन के तकनीकी रूप से जटिल और सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शुरू की गई यह पहल भारत में मुख्य औद्योगिक और प्रोसेस कंट्रोल भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
डीसीएस रिफाइनरी का मुख्य केंद्र है, जो सैकड़ों डेटा स्ट्रीम्स को एकीकृत करके उत्पादन प्रक्रियाओं पर सुचारु नियंत्रण सुनिश्चित करता है। इस डिजिटल कार्य में महिलाओं को शामिल करके वेदांता एल्युमीनियम एक समावेशी औद्योगिक कार्यबल बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। इनकी भूमिका में प्रक्रिया से जुड़े मानकों की रियल-टाइम निगरानी, संचालन के रुझानों का विश्लेषण, सुरक्षा अलार्म का आकलन करना और रिफाइनरी के संचालन को स्थिर, कुशल और सुरक्षित बनाए रखने के लिए त्वरित निर्णय लेना शामिल है।
इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए, राजीव कुमार, सीईओ, वेदांता एल्युमीनियम ने कहा की “वेदांता एल्युमीनियम में महिलाओं को उच्च कौशल वाले औद्योगिक कार्यों में नेतृत्व देने के लिए सशक्त बनाना कोई पहल भर नहीं है, बल्कि कंपनी के रूप में हमारी दिशा भी है। जैसे-जैसे अधिक महिलाएँ कमांड सेंटर, स्मेल्टर, लोकोमोटिव और सुरक्षा प्रणालियों का संचालन कर रही हैं, हम ऐसा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित कर रहे हैं, जहाँ उत्कृष्टता के लिए लिंग कोई बाधा नहीं है। महिलाओं की भागीदारी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की हमारी दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा इस विश्वास को दर्शाती है कि औद्योगिक विकास की अगली बड़ी छलांग में महिलाएँ अहम् भूमिका निभाएँगी।”
यह पहल उच्च कौशल वाले औद्योगिक कार्यों में महिलाओं के लिए अवसरों का विस्तार करने के उद्देश्य से वेदांता एल्युमीनियम द्वारा किए जा रहे व्यापक बदलाव का हिस्सा है। टीम की एक सदस्य अंजनी कुमारी, डीसीएस, ने कहा, “कमांड सेंटर में काम करने से मुझे यह विश्वास मिलता है कि महिलाएँ भी विनिर्माण क्षेत्र में केंद्रीय भूमिका निभा सकती हैं। मुझे उम्मीद है कि हमारी टीम कई और युवा महिलाओं को इंजीनियरिंग और ऑपरेशंस में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगी।”
पिछले कुछ वर्षों में वेदांता एल्युमीनियम ने भारत की पहली पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित पॉटलाइन शुरू की है और स्मेल्टिंग तथा उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में 100 से अधिक महिलाओं को तैनात किया है। कंपनी ने अपने एल्युमीनियम संचालन में देश की पहली पूरी तरह महिला लोकोमोटिव इंजन क्रू भी शुरू की है, जिससे पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान भूमिकाओं में समावेशन के नए मानक स्थापित हुए हैं। इसके अलावा, वेदांता एल्युमीनियम ओडिशा में नाइट शिफ्ट में महिलाओं को शामिल करने वाली पहली कंपनी भी बनी। सुरक्षा और आपातकालीन तैयारी को और मजबूत करते हुए, कंपनी ने अग्निवाहिनी नामक पूरी तरह महिला फायरफाइटिंग और आपातकालीन प्रतिक्रिया इकाई तैनात की है। इस इकाई के माध्यम से 100 से अधिक महिलाओं को अग्रिम पंक्ति के सुरक्षा कर्मियों के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जिससे संचालन में बेहतर तैयारी और मजबूत सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा मिला है।
वेदांता एल्युमीनियम 135 मेगावाट की एक पॉवर यूनिट का संचालन संभालने के लिए पूरी तरह महिलाओं की थर्मल पॉवर ऑपरेशंस टीम भी स्थापित की है, जिससे लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाली औद्योगिक प्रथाओं में उसकी नेतृत्व भूमिका और भी मजबूत हुई है। अब बड़ी संख्या में महिलाएँ क्वालिटी लैबोरेटरी, डिजिटलीकरण से जुड़े कार्यों और माइनिंग इंजीनियरिंग जैसी भूमिकाओं में योगदान दे रही हैं। इसके साथ ही भारत के विनिर्माण क्षेत्र में उच्च तकनीक और उच्च जिम्मेदारी वाले पदों पर महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में वेदांता एल्युमीनियम के कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 21% है। कंपनी आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर पहले 35% और फिर 50% तक ले जाने की योजना बना रही है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए, कंपनी में प्रवेश स्तर (एंट्री-लेवल) की भर्तियों में अब 50% से अधिक महिलाएँ शामिल हैं, ताकि भविष्य में तकनीकी और नेतृत्व पदों पर महिलाओं की भागीदारी और अधिक बढ़ सके।
जैसे-जैसे भारत के विनिर्माण और धातु क्षेत्र एक अधिक तकनीक-आधारित और संसाधन-केंद्रित भविष्य का समर्थन करने के लिए विस्तार कर रहे हैं, वेदांता एल्युमीनियम की पहलें यह सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखती हैं कि महिलाएँ इस बदलाव का केवल हिस्सा ही न हों, बल्कि इसे आकार देने में अग्रणी भूमिका भी निभाएँ।

