NOW HINDUSTAN. Bihar News- माध्यमिक विद्यालय मे छात्रों ने एडमीट कार्ड लेने के लिए भीड़ उमड़ी। राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राजापाकर के प्रधानाध्यापक द्वारा सभी समाचार पत्रों में पर्ची लेकर एडमिट कार्ड देने की खबर छपने के बाद भी आज दूसरे दिन भी परीक्षा में शामिल होने से पूर्व छात्राओं द्वारा स्कूल के बगल के नेहा टेलकम दुकान पर पर्ची एडमिट कार्ड लेने के लिए भारी भीड़ देखी गई. वही 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले छात्रों से शपथ पत्र के नाम पर पैसे वसूले जाने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. मंगलवार को परीक्षा के दूसरे दिन भी कई छात्र विद्यालय से बाहर निकलकर पास की दुकानों की ओर जाते दिखे. जहां से वे शपथ पत्र खरीदकर परीक्षा में शामिल होते नजर आए. छात्रों ने बताया कि कम उपस्थिति वाले विद्यार्थियों को पहले परीक्षा कक्ष में बैठने से रोका गया और बाद में शपथ पत्र लाने की बात कही गई. इसके बाद छात्र विद्यालय के पास स्थित दुकान पर जाकर शपथ पत्र लेकर आए. कई छात्रों के हाथ में 250 रुपये की रसीद भी देखी गई।
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मामले को लेकर एक और नया सवाल तब खड़ा हो गया जब दुकानदार द्वारा दिया गया शपथ पत्र सामने आया. छात्रों के अनुसार दुकानदार ने जो शपथ पत्र दिया. वह नोटरी पब्लिक का प्रारूप था. हालांकि उस शपथ पत्र पर न तो शपथकर्ता के हस्ताक्षर थे और न ही अंगूठे का निशान दर्ज था. ऐसे में बिना हस्ताक्षर और पहचान के दिए जा रहे शपथ पत्र की वैधता को लेकर भी सवाल खड़ा होता है .इस मामले में विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं. कई अभिभावकों ने आरोप लगाया कि परीक्षा में शामिल होने की मजबूरी का फायदा उठाकर छात्रों से पैसे वसूले गए.
मामले के तूल पकड़ने के बाद वैशाली जिला शिक्षा पदाधिकारी रविन्द्र कुमार ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए विद्यालय के प्रधानाध्यापक से 24 घंटे में स्पष्टीकरण मांगा है. तथा स्पष्टीकरण देने तक उनका वेतन स्थगित रहने का पत्र में बात कही गई है. उन्होंने कहा है कि प्राप्त शिकायतों के आधार पर मामले की जांच कराई जा रही है और दोषी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. वही प्रधानाध्यापक के कारनामे से चौक चौराहों पर चर्चा का बाजार गर्म हो गया है।
संवाददाता राजेन्द्र कुमार

