बारिश में केवल खूबसूरती नहीं, खतरा भी * उफनते झरने, फिसलन भरी चट्टानें और गहराता पानी बन सकता है जानलेवा…..

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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देवपहरी, परसखोला, केंदई, फुटहामुड़ा, सतरेंगा सहित अन्य पिकनिक स्थलों पर बरसात के दौरान विशेष एहतियात बरतने दी नसीहत

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NOW HINDUSTAN. Korba. मानसून में बारिश के साथ कोरबा जिले के जलप्रपात और पिकनिक स्थल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण लोगों को सबसे अधिक आकर्षित करते हैं। पहाड़ों से उतरता दूधिया पानी, हरियाली से ढके जंगल, बादलों के बीच गूंजती झरनों की आवाज और चट्टानों पर बहती जलधाराएं किसी का भी मन मोह लेती हैं। लेकिन यही खूबसूरती बरसात के दिनों में सबसे बड़ा खतरा भी बन जाती है।

तेज बारिश के कारण जलप्रपातों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है। शांत दिखाई देने वाली जलधारा कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले सकती है। ऊपर के क्षेत्रों में हुई बारिश का पानी कब नीचे आ जाए, इसका अनुमान लगाना लगभग असंभव होता है। पानी के भीतर छिपी गहरी खाइयां, धारदार चट्टानें, तेज बहाव और फिसलन किसी भी छोटी-सी चूक को बड़े हादसे में बदल सकती है।

बरसात के मौसम में पर्यटन स्थल देवपहरी, परसखोला, केंदई, फुटहामुड़ा, सतरेंगा, नकिया सहित जिले के अन्य अनेक पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग परिवार और मित्रो के साथ पहुंचते हैं। कई लोग सेल्फी लेने, वीडियो बनाने या झरनों के बिल्कुल पास जाकर नहाने की कोशिश करते हैं। यही लापरवाही कई बार जिंदगी पर भारी पड़ जाती है।

जिले में बीते वर्षों में ऐसे कई दर्दनाक हादसे सामने आए हैं, जिनमें छात्र, युवा और पर्यटक पानी में बह गए या चट्टानों के बीच फंस गए। कई परिवारों ने अपने घर का इकलौता बेटा खोया, तो कई माता-पिता की उम्मीदें हमेशा के लिए टूट गईं। इन घटनाओं से सबसे बड़ी सीख यही मिलती है कि प्रकृति का आनंद लें, लेकिन उसकी शक्ति को कभी चुनौती न दें।
बारिश के दौरान चट्टानों पर काई जम जाती है। ऊपर से मजबूत दिखाई देने वाले पत्थर बेहद फिसलन भरे हो जाते हैं। कई स्थानों पर पानी के नीचे गड्ढे, सुरंगनुमा चट्टानें और तेज धाराएं होती हैं, जो बाहर से दिखाई नहीं देतीं। एक बार पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने पर स्वयं को संभालना बेहद कठिन हो जाता है।

प्रशासन द्वारा कई स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। पुलिस, नगर सेना और एसडीआरएफ लगातार लोगों से सावधानी बरतने की अपील करते हैं, लेकिन कई लोग इन चेतावनियों को नजरअंदाज कर जोखिम वाले स्थानों तक पहुंच जाते हैं। हादसा होने के बाद बचाव दल पूरी कोशिश करता है, लेकिन तेज बहाव, बारिश, अंधेरा और दुर्गम चट्टानों के कारण हर बार समय पर बचाव संभव नहीं हो पाता।
* प्रकृति का आनंद लें, जोखिम नहीं

पिकनिक का मतलब केवल पानी में उतरना नहीं है। झरनों की कल-कल आवाज सुनिए, बारिश से धुले जंगलों की हरियाली देखिए, पक्षियों की चहचहाहट का आनंद लीजिए, परिवार और दोस्तों के साथ सुरक्षित स्थान पर बैठकर यादगार पल बिताइए। दूर से झरनों की खूबसूरती कैमरे में कैद कीजिए, लेकिन खतरनाक चट्टानों या तेज बहाव के बीच जाने का प्रयास बिल्कुल न करें। याद रखिए, प्रकृति हमें सुकून देने के लिए है, परीक्षा लेने के लिए नहीं।

*बरसात में पिकनिक पर जाते समय रखें सावधानियां
तेज बारिश या मौसम खराब होने पर पिकनिक का कार्यक्रम टाल दें। किसी भी झरने या नदी में नहाने अथवा पानी में उतरने का जोखिम न लें। चेतावनी बोर्ड और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। फिसलन भरी चट्टानों पर चढ़ने या सेल्फी लेने से बचें। बच्चों और किशोरों को अकेले पानी के पास न जाने दें। मादक द्रव्य पदार्थ या अन्य किसी नशे की हालत में पर्यटन स्थल पर बिल्कुल न जाएं। अपने साथ प्राथमिक उपचार सामग्री, टॉर्च, रस्सी और मोबाइल रखें। वाहन सावधानीपूर्वक चलाएं और अंधेरा होने से पहले घर लौट आएं। किसी दुर्घटना की स्थिति में स्वयं बचाव का जोखिम लेने के बजाय तुरंत पुलिस, डायल 112 या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें। पिकनिक स्थल पर प्लास्टिक, बोतलें और अन्य कचरा न फैलाएं।
बरसात का मौसम प्रकृति की सबसे सुंदर सौगात है, लेकिन यही मौसम सबसे अधिक सतर्क रहने का भी है। कुछ घंटों का रोमांच पूरी जिंदगी के दुख में न बदल जाए, इसलिए सुरक्षित रहें, परिवार को सुरक्षित रखें और केवल यादें लेकर घर लौटें, हादसे नहीं।

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