NOW HINDUSTAN. कोरबा। कोरबा रेलवे स्टेशन के सेकेंड एंट्री पर प्लेटफॉर्म निर्माण की योजना पिछले करीब 10 वर्षों से अधर में लटकी हुई है। रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा और स्टेशन पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सेकेंड एंट्री विकसित करने की बात लंबे समय से कही जाती रही है, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद यह योजना पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी है। इसका खामियाजा रोजाना रेल यात्रियों को अव्यवस्था, असुविधा और अनिश्चितता के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
आम आदमी पार्टी कोरबा ने सवाल उठाया है कि जब रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कोरबा एक महत्वपूर्ण औद्योगिक शहर है, तो सेकेंड एंट्री पर प्लेटफॉर्म जैसी बुनियादी यात्री सुविधा के निर्माण में इतनी लंबी देरी क्यों की जा रही है? आखिर 10 साल में भी एक प्लेटफॉर्म का निर्माण पूरा क्यों नहीं हो पाया?
पार्टी का कहना है कि सेकेंड एंट्री का उद्देश्य स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार पर यातायात और यात्रियों का दबाव कम करना तथा आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को सुविधाजनक पहुंच उपलब्ध कराना था। लेकिन निर्माण कार्य के लंबे समय से अधूरे रहने के कारण पूरी व्यवस्था का लाभ यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है। बारिश के मौसम में कीचड़, जलभराव और खराब पहुंच मार्ग जैसी समस्याएं यात्रियों की परेशानी और बढ़ा देती हैं।
*आम आदमी पार्टी कोरबा का रेलवे से सवाल—*
1. सेकेंड एंट्री पर प्लेटफॉर्म निर्माण की योजना आखिर कब स्वीकृत हुई थी?
2. पिछले 10 वर्षों में इस योजना पर कितनी राशि स्वीकृत और खर्च की गई?
3. निर्माण कार्य अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ?
4. योजना को पूरा करने की वर्तमान समय-सीमा क्या है?
5. देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों अथवा निर्माण एजेंसी पर क्या कार्रवाई हुई?
6. यात्रियों की सुविधा के लिए जब सेकेंड एंट्री विकसित की जा रही है तो वहां मूलभूत सुविधाएं कब तक उपलब्ध होंगी?
आम आदमी पार्टी ने कहा कि रेलवे केवल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने और नए उद्घाटनों की घोषणा तक सीमित न रहे, बल्कि मौजूदा स्टेशनों पर यात्रियों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराए। दस साल तक किसी योजना का अधूरा पड़े रहना विकास कार्यों की गति और रेलवे प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि रेलवे सेकेंड एंट्री पर प्लेटफॉर्म निर्माण की वर्तमान स्थिति, स्वीकृत बजट, खर्च की गई राशि और कार्य पूरा होने की निश्चित समय-सीमा सार्वजनिक करे। साथ ही लंबित निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर पूरा कर यात्रियों को जल्द से जल्द सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

