NOW HINDUSTAN. Korba. कोरबा। ऊर्जाधानी कोरबा में हसदेव नदी और चुईया नाला से रेत के कथित अवैध उत्खनन, डंपिंग और परिवहन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राताखार, गेरवाघाट और नदियाखार सहित विभिन्न क्षेत्रों में रात के समय रेत से लदे ट्रैक्टर, टिपर और हाइवा वाहनों की आवाजाही होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ वाहन बिना नंबर प्लेट के भी सड़कों पर दौड़ते नजर आते हैं। ऐसे में खनिज विभाग और पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल
खनिज विभाग के उप संचालक प्रमोद कुमार नायक और सहायक खनि अधिकारी राकेश वर्मा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि रात के समय रेत के कथित अवैध उत्खनन और परिवहन की सूचना देने पर मौके पर तत्काल कार्रवाई करने के बजाय संबंधित वाहन का नंबर मांगा जाता है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि क्षेत्रवार अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती के बावजूद यदि इस तरह की गतिविधियां जारी हैं, तो निगरानी व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। मामले में विभागीय कार्रवाई की स्थिति भी स्पष्ट होना आवश्यक है।बिना नंबर प्लेट और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही पर चिंता। स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि रेत से लदे कुछ ट्रैक्टर और भारी वाहन रात के समय बिना प्रभावी जांच के आवाजाही करते हैं। यदि बिना पंजीकरण नंबर प्लेट, वैध ई-ट्रांजिट पास या रॉयल्टी दस्तावेजों के खनिज का परिवहन हो रहा है, तो इसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सवाल यह भी है कि प्रमुख मार्गों और नदी घाटों से निकलने वाले वाहनों की नियमित जांच की जा रही है या नहीं। खनिज विभाग और पुलिस के बीच समन्वय के अभाव में ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण मुश्किल हो सकता है।
पत्रकारों के सवाल और शिकायतों को लेकर भी आरोप
रेत परिवहन से जुड़े मामलों की जानकारी जुटाने वाले पत्रकारों को कथित तौर पर दबाव और झूठी शिकायतों का सामना करना पड़ने के आरोप भी लगाए गए हैं। आरोप है कि अवैध परिवहन की जानकारी सामने लाने या वाहनों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने पर संबंधित लोगों के खिलाफ शिकायतें करने की कोशिश होती है।
इन आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है। यदि किसी पत्रकार के विरुद्ध दुर्भावनापूर्ण शिकायत किए जाने की बात सामने आती है, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं, किसी भी शिकायत पर कार्रवाई तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जानी चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन जरूरी
नदी घाटों पर रेत खनन और परिवहन के दौरान पर्यावरणीय शर्तों, स्वीकृत खनन योजना तथा लागू नियमों का पालन अनिवार्य है। अवैध उत्खनन से नदी के प्राकृतिक प्रवाह, तटों और जलीय पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए हसदेव नदी और चुईया नाला के संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण और नियमानुसार निगरानी जरूरी है।
रेत खनन और परिवहन की वैधता संबंधित अनुमति, पर्यावरणीय स्वीकृति, लागू समय-सीमा तथा दस्तावेजों के आधार पर तय होती है। ऐसे में सूर्यास्त के बाद खनन या परिवहन पर लागू प्रतिबंधों की भी संबंधित अधिकारियों से स्पष्ट जानकारी ली जानी चाहिए।
उच्चाधिकारियों से जांच और कार्रवाई की मांग
पूरे मामले में जिला प्रशासन और खनिज विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की जा रही है कि राताखार, गेरवाघाट, नदियाखार और चुईया नाला क्षेत्र का औचक निरीक्षण कराया जाए। रेत से लदे वाहनों के दस्तावेजों, ई-ट्रांजिट पास, रॉयल्टी, वाहन पंजीकरण और स्वीकृत खनन स्थलों की जांच की जाए।
यदि जांच में अवैध उत्खनन या परिवहन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, शिकायतों पर विभागीय स्तर पर हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो सके।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और हसदेव नदी व चुईया नाला क्षेत्र में खनन गतिविधियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए क्या कदम उठाता है।
