नसबंदी करवाने 2 ,500 से 5000 रुपये तक की मांग करने लगाया आरोप, सरकारी अस्पताल का मामला …

Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN कोरबा एक ओर जहां सरकार के द्वारा जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए नसबंदी को प्रोत्साहन दिया जा रहा है तो दूसरी ओर सरकारी अस्पताल में महिलाओं की नसबंदी करने के एवज में उन्हें प्रोत्साहन राशि देने की बजाय उनसे ही रुपए लिए जाने का आरोप लगाया गया हैं। इस मामले में संज्ञान लेते हुए खंड चिकित्सा अधिकारी के द्वारा संबंधित चिकित्सक को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब प्रस्तुत करने कहा गया है। मामला जिले के अंतिम छोर पाली विकासखण्ड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पाली का बताया जा रहा हैं जहा विभिन्न ग्रामों की कुछ महिलाएं मितानिन के माध्यम से नसबंदी करवाने पहुँची जिन्होने नसबंदी करने के एवज में रुपये लिए जाने का आरोप लगाया हैं।
जानकारी के अनुसार पाली अस्पताल में ज़िला खनिज न्यास मद से पदस्थ डाक्टर ने इनकी नसबंदी की। हितग्राहियों से पूछताछ करने पर उनके परिजनों ने आरोप लगाते हुए बताया की वे मितानिन के माध्यम से नसबंदी करवाने पहुँची है और डाक्टर ने उनकी नसबंदीकी हैं जिसके लिए मितानिन को 2500 रूपए से पाँच हजार प्रति व्यक्ति के हिसाब से पैसा दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा मितानिनों को ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक के रूप में साधारण उल्टी, दस्त, बुखार की दवाई एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी परामर्श खासकर महिलाओं से संबंधित समस्याओं के निदान (नसबंदी, प्रसव) के लिए गाँवों में मानसेवी नियुक्ति दी है किंतु अनेक स्वास्थ्य सेवक ही कई डाक्टरों के एजेंट के तौर पर काम करते नज़र आ रही हैं।
बताया जा रहा हैं की सरकारी अस्पताल सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पाली में पदस्थ गायनेकोलाजिस्ट डाक्टर का सरकारी अस्पताल के कुछ कदम के दूरी पर ही उनका निजी अस्पताल संचालित है। एक ओर सरकारी खजाने से डाक्टर साहब को लाखों का वेतन दिया जाता है, वही दूसरी ओर डाक्टर साहब ने सरकारी अस्पताल से अपने निजी अस्पताल में रेफ़र का खेल जारी रखा है। मरीज़ो ने बताया कि डाक्टर साहब सरकारी अस्पताल से ज्यादा समय अपने निजी अस्पताल में सेवा देते नज़र आते हैं।

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