सामाजिक समरसता पर केंद्रित चार दिवसीय अखिल भारतीय कला साधक संगम संपन्न……

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN.  Korba कला एवं साहित्य के लिए समर्पित अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती का “सामाजिक समरसता” पर केंद्रित चार दिवसीय अखिल भारतीय कला साधक संगम कर्नाटक के बैंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग अंतराष्ट्रीय केन्द्र में पूरे देश के विभिन्न प्रांतों से आए हुए लगभग 2000 कला साधकों की उपस्थिति में संपन्न हुआ । इस चार दिवसीय कला साधक संगम के प्रथम दिवस 1 फरवरी को उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि मैसूर के राजा युद्धवीर चामराज दत्ता, वासुदेव कामत राष्ट्रीय अध्यक्ष संस्कार भारती , विशेष अतिथि पंडित रविन्द्र यागवाल प्रसिद्ध तबला वादक, लोक गायक पद्मश्री मंजूमा दीदी मंचासीन रहे । ध्येय गीत के साथ प्रारंभ हुए उद्घाटन सत्र में संस्कार भारती के संस्थापक कला ऋषि पद्मश्री बाबा योगेंद्र जी एवं संस्कार भारती के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री स्वप्नदृष्टा स्व. अमीर चंद पर केंद्रित पुस्तक “कला दधीचि योगेंद्र” एवं “कला नीतिज्ञ अमीरचंद” का विमोचन किया गया । तत्पश्चात पूर्वोत्तर राज्य के कला साधकों ने अपने पारंपरिक बांस नृत्य, झाऊ नृत्य, बांसुरी वादन की प्रस्तुति से समा बांधा । इस अवसर पर विभिन्न प्रांतों के चित्रकारों एवं शिल्पकारों द्वारा सामाजिक समरसता पर बनाए गए चित्रों, भू अलंकरण, अल्पना इत्यादि की प्रदर्शनी का उद्घाटन भी अतिथियों द्वारा किया गया ।

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द्वितीय दिवस 2 फरवरी को सेमिनार की शुरुवात प्रसिद्ध लोकगायिका डा. मालिनी अवस्थी जी की अध्यक्षता व श्री रविन्द्र किरकोली प्रचारक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, डा. इंदुशेखर तत्पुरुष साहित्यकार जयपुर, डा. अनिल सैकिया रंगमंचीय साहित्य असम, डा. अदिति नारायण पासवान दलित कला विशेषज्ञ के विशेष आतिथ्य में प्रारंभ हुआ । जिसमे “सामाजिक समरसता को पुष्ट करने में कलाओं की भूमिका और प्रभाव” पर सभी विशेषज्ञों ने अपना मंतव्य प्रभावी रूप से रखा । डा. मालनी अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा की भगवान राम सामाजिक समरसता के आदर्श नायक के रूप में सबके मन में स्थापित हैं । उन्होंने कहा प्रभु राम भारत की आत्मा हैं । उक्त विषय पर अन्य अतिथियों ने भी अपनी बात रखी । सांध्य आयोजन में मालवा प्रांत का नाट्य मंचन “हिंदवा सहोदरा”, कर्नाटक प्रांत की भगवान राम निषाद प्रसंग, राम शबरी प्रसंग एवं राम सेतु पर केंद्रित नृत्य नाटिका, पश्चिम महाराष्ट्र द्वारा पोवाड़ा गोंधल एवं रासड़ो लोककला की प्रस्तुति, बाल शिवाजी पर केंद्रित नाटक, दिल्ली द्वारा रामायण समरसता पर कथक नृत्य नाटिका एवं समरसता कवि सम्मेलन प्रमुख रहे।


तृतीय दिवस 3 फरवरी की शुरुवात भारतमुनि सम्मान से हुई । जिसके मुख्य अभ्यागय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत, अध्यक्षता श्री वासुदेव कामत ने की । लोककला के संरक्षण व संवर्धन के लिए श्री गणपत सखाराम म्हस्के एवं दृश्य कला के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले श्री विजय दशरथ आचरेकर को वर्ष 2024 का भरत मुनि सम्मान दिया गया । उन्हें स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र एवं एक लाख पचास हजार की राशि प्रदान की गई। इस अवसर पर मोहन भागवत ने कहा कि संस्कार भारती इतना सामर्थ्यवान बना है कि वो गौरव अर्पण कर सके । यह आयोजन इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा की राम मंदिर के निर्माण से भारत का स्व वापस लौटा है। आयोजन में नीतीश भारद्वाज मुंबई द्वारा निर्देशित नाटक “कृष्ण कहे” का मंचन, छऊ लोकनृत्य, मराठी नृत्य नाटिका “वारी वारी जन्माची वारी”, विविध भारतीय भाषाओं में समरसता गीत “समरस संघ सरिता”, लोकनृत्य “बधाई तथा किंदर जोगी, हगलू वेशा, कुचुपुड़ी नृत्य “शबरी के राम”, एवं ट्रांसजेंडर समानता पर सुश्री रेशमा प्रसाद ने प्रोजेक्टर के माध्यम से अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए।


अंतिम दिवस 4अक्टूबर की शुरुवात समरसता शोभायात्रा से हुई जिसमें विभिन्न प्रांतों से आए हुए कला साधक अपने प्रांत की वेशभूषा में शामिल हुए । शोभायात्रा में प्रांतों की आध्यात्मिक व सामाजिक विशिष्टता स्पष्ट परिलक्षित हो रही थी। समापन समारोह के मुख्य अभ्यागत आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक एवं धर्म गुरु श्री श्री रविशंकर जी एवं सम्माननीय सरसंघचालक मोहन भागवत जी विशेष रूप से उपस्थित थे । इस अवसर राष्ट्रीय महामंत्री श्री अश्विन दलवी द्वारा चार दिवसीय कला साधक संगम का संक्षिप्त वृत्तांत प्रस्तुत किया गया । इस अवसर पर श्री मोहन जी भागवत ने उपस्थित कला साधकों को ऊर्जांवित करते हुए कहा कि कार्यकर्ता वही होता है, जो कार्य को समर्पित भाव से करे , जिसमें फूहड प्रदर्शन ना हो । उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता को अपने दायित्व का बोध होना चाहिए जिसका निर्वाह पूरी निष्ठा के साथ किया जाना आवश्यक है । श्री श्री रविशंकर महाराज ने जीवन में सफलता के लिए युक्ति, शक्ति, भक्ति एवं मुक्ति की आवश्यकता प्रतिपादित की । उन्होंने कहा कि आजादी का आशय कुछ भी करना नहीं होता , जीवन में अनुशासन एवं मर्यादाओ का ध्यान हम सभी को रखना चाहिए तभी अपने लक्ष्य की प्राप्ति होती है । राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रसिद्ध चित्रकार वासुदेव कामत ने कहा कि यह समरसता कला यज्ञ सम्पन्न हुआ जो कि कार्यक्रमों की प्रतियोगिता स्वरूप नहीं था ।
इस कला साधक संगम मे संस्कार भारती छत्तीसगढ़ के 12 जिला इकाइयों से 35 कार्यकर्ताओं एवं 5 कलाकारों भाग लिया । कोरबा जिले से हेमन्त माहुलीकर प्रांतीय महामंत्री , अरुण दास वैष्णव प्रांतीय लोककला सहसंयोजक , हरिसिंह क्षत्री प्रांतीय प्राचीन कला विधा संयोजक ,श्रीमती गंगा कौशिक प्रांतीय भू अलंकरण विधा संयोजक , शिवकुमार दुबे जिला महामंत्री ,आशीष शर्मा जिला कोषाध्यक्ष और अखिलेश श्रीवास जिला कार्यकारिणी सदस्य ने भाग लिया ।

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