तीन दिवसीय शोध-संगोष्ठी एवं रीवा उत्खनन स्थल परिभ्रमण का किया गया आयोजन ….

Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. छत्तीसगढ़ का इतिहास : राष्ट्रीय परिपेक्ष में विषय पर आधारित शोध -संगोष्ठी का आयोजन संचालनालय पुरातत्व ,अभिलेखागार एवं संग्रहालय छत्तीसगढ़ द्वारा महंत घासीदास संग्रहालय परिसर रायपुर में तीन दिवसीय शोध-संगोष्ठी एवं रीवा उत्खनन स्थल परिभ्रमण का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में कुल 40 से अधिक पुरातत्वविदों ने अपने-अपने शोधों पर आधारित शोध पत्रों का वाचन किया। यह संगोष्ठी तीन दिन दिनांक 16/17/18 फरवरी 2024 तक चला, जिसमें पहले दिन कुल 16 शोधपत्रों का वाचन किया गया। जिसमें डॉक्टर मोना जैन, डॉक्टर आशुतोष चौरे, डॉक्टर मंगलानंद झा, प्रशांत कुमार चौरे, डॉक्टर वृषोत्तम साहू ,डॉक्टर राकेश चंदेल, डॉक्टर अनिल कुमार भंतपहरी ,डॉक्टर नितिन पांडे हरि सिंह क्षत्री , रामकुमार वर्मा ,कुमार गौरव, श्रवण चौधरी आदि विद्वानों ने अपने-अपने शोध पत्रों का वाचन किया ‌।
वहीं संगोष्ठी के दूसरे दिन दिनांक 17 फरवरी 2024 को 24 से अधिक शोध पत्रों का वाचन हुआ। जिसमें डॉक्टर अनामिका शर्मा, डॉक्टर आशीषधर दीवान ,डॉक्टर सुशीला कुजूर , मनहरण लाल लहरे ,विनोद कुमार पांडेय ,डॉक्टर पीसी लाल यादव, प्रिया रानी नेटी, ओम प्रकाश सोनी, अजय कुमार चतुर्वेदी, डॉक्टर विजय शर्मा, डॉक्टर के पी वर्मा, प्रिया शर्मा ,नीलिमा मरकाम , अंकिता भोई, डॉ राजकुमार वर्मा, डॉ भेनू, राहुल सिंह पूर्व संयुक्त संचालक संस्कृति विभाग आदि विद्वानों ने अपने-अपने शोध पत्रों का पाचन किया । इस संगोष्ठी में जिला पूरातत्व संग्रहालय कोरबा के मार्गदर्शक हरि सिंह क्षत्री ने अपने शोधपत्र वाचन में जिले के एकमात्र संरक्षित स्मारक कुदुरमाल कबीर मठ पर आधारित अपने शोध पत्र, भारतीय स्थापत्य कला का अल्पज्ञात आयाम: कुदुरमाल का कबीरपंथी मठ का वाचन किया । साथ ही जहाॅं उन्होंने इस मठ का संपूर्ण इतिहास का उल्लेख किया, वहीं उन्होंने इस मठ की सुरक्षा पर भी विभाग का ध्यान आकर्षण कराया किया कि यहाॅं लगे सभी काष्ठ शिल्पों को दीमक खा रहे हैं । स्मारक में लगाई गई लकड़ियों को दीमक लगने से यहाॅं का छत भी कमजोर हो जाने से उनका भरभरा कर गिर जाने की भावी संकेत पर भी विभाग को अवगत कराया। संगोष्ठी का तीसरा दिन स्थल परिभ्रमण का होता है ,जिसके लिए रायपुर से 26 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में स्थित आरंग के समीप स्थित रीवा उत्खनन स्थल को चुना गया । यहाॅं संचालनालय द्वारा प्राचीन मृतिकागढ़ क्षेत्र में उत्खनन कराया जा रहा है । जिसमें विभिन्न प्रकार के स्तूपों के अलावा आरंभिक ऐतिहासिक कालीन बस्ती के अवशेष प्रकाश में आ रहे हैं। उत्खनन के दौरान आहत या पंचमार्क सिक्के, ठप्पांकित सिक्के, मघ, कुषाण और कलचुरी शासको के सिक्के सहित उत्तरी मार्जित मृदभांड, ब्लैक आन रेड वेयर आदि पात्र, परंपरा के ठीकरा , मूर्तियाॅं स्थापत्य खंड बिड्स ,रिंग कुपवेल आदि मिल रहे हैं। जिसका शोधार्थियों और विद्वानों ने अध्ययन किया । राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन छत्तीसगढ़ का इतिहास राष्ट्रीय परिपेक्ष में 16 से 18 फरवरी 2024 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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