जनपद पंचायत पोड़ी-उपरोड़ा में मनरेगा बना भ्रष्टाचार का हब, नियम कानून दरकिनार, 60 फीसदी मजदूरी और 40 फीसदी समाग्री व्यय नियम की उड़ाई धज्जियां, प्रभारी कार्यक्रम अधिकारी और जिला पंचायत के सहायक परियोजना अधिकारी की मिलीभगत…..

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN कोरबा। केन्द्र सरकार की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को जिले के पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक में भ्रष्टाचार का हब बना दिया है। पोड़ी-उपरोड़ा के प्रभारी कार्यक्रम अधिकारी और जिला पंचायत के सहायक परियोजना अधिकारी ने भ्रष्टाचार की जुगलबंदी कर नियमों को धता बता दिया है। मनरेगा के 60 फीसदी मजदूरी और 40 फीसदी सामाग्री में व्यय नियम की धज्जियां उड़ाते हुए मजदूरी से कहीं अधिक सामाग्री व्यय किया गया है। जनपद पंचायत पोड़ी-उपरोड़ा में वर्ष 2023-24 के दौरान अप्रैल 2023 में यह गड़बड़ी की गई है। माह में मजदूरी मद में 4 करोड़ 25 लाख 37 हजार और वहीं सामाग्री मद में 7 करोड़ 16 लाख 85 हजार रूपये का व्यय किया गया है, जबकि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के नियम अनुसार मजदूरी और सामाग्री व्यय का अनुपात क्रमश: 60-40 फीसदी होता है यानि मजदूरी 60 फीसदी देनी है। वहीं 40 फीसदी राशि सामाग्री के लिए व्यय करना है। वहीं दूसरी ओर जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा के प्रभारी कार्यक्रम अधिकारी और जिला पंचायत कोरबा के सहायक परियोजना अधिकारी ने मिलीभगत कर मजदूरी के अनुपात से कहीं अधिक सामाग्री व्यय किया है। मनरेगा के नियमों के नियमों को ताक पर रखकर 22 फीसदी सामाग्री में अधिक भुगतान कर दिया गया है। लगभग 3 करोड़ की राशि सामाग्री व्यय में की गई है। इस तरह जनपद पंचायत पोड़ी-उपरोड़ा में केन्द्र सरकार के रोजगार गारंटी कानून को भी भ्रष्टाचार की जद में ले लिया गया है। केन्द्र सरकार की मंशा है कि ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार मिले इसके लिए मनरेगा की शुरूआत की गई है, लेकिन अधिकारियों के भ्रष्टाचार वाले प्रवृत्ति के कारण इसमें भी अनियमितता की गई है। ऐसे में पोड़ी-उपरोड़ा जनपद पंचायत में किए गए भ्रष्टाचार में केन्द्रीय जांच एजेंसियों से जांच की जरूरत महसूस हो रही है। जांच में इस भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है।

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पाली जनपद में भी नियम दरकिनार
पोड़ी-उपरोड़ा की तरह पाली ब्लॉक में भी इस नियम को दरकिनार किया गया है। पाली में अप्रैल माह में 3 करोड़ 50 लाख 83 हजार मजदूरी और इससे कहीं अधिक 8 करोड़ 47 लाख 53 हजार रूपये सामाग्री व्यय किया गया है। इसके अलावा करतला में भी 4 करोड़ 58 लाख 90 हजार रूपये सामाग्री व्यय और 1 करोड़ 22 लाख 88 हजार रूपये मजदूरी में खर्च किए गए हैं।

जांच में खुलेगी पोल
मनरेगा में किए गए भ्रष्टाचार की पोल खुलेगी। मनरेगा में पारदर्शिता लाने ऑनलाईन रिकार्ड दर्ज किया जाता है। नरेगा स्ट्रेप डॉट निक डॉट इन में मजदूरी और सामाग्री व्यय का पूरा लेखा जोखा ऑनलाईन दर्ज होता है। ब्लॉकवार मजदूरी और सामाग्री व्यय में नियम विरूद्ध खर्च का आंकड़ा साफ-साफ प्रदर्शित हो रहा है। केन्द्र सरकार ने मनरेगा के वेबसाइट में माहवार व्यय की गई जानकारी प्रदर्शित की है। जिसकी जांच में संबंधितों का भ्रष्टाचार सामने आएगा।

जब इस सबंध में मनरेगा के अधिकारी संदीप डिकसेन ने मीडिया से चर्चा करने से इनकार करते हुए कहा कि वो कुछ नही बोल सकते है ।उच्च अधिकारी ही जानकारी दे सकते है।

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