दीपका खदान हादसे में मृतकों के परिवारों को 20-20 लाख मुआवजा देने की मांग…

Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया के अधीन संचालित एसईसीएल बिलासपुर की कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित खुले मुहाने की गेवरा कोयला परियोजना अंतर्गत एसईसीएल की मेगा प्रोजेक्ट एसईसीएल दीपका में बंद पड़ी खदान हादसे में कोयला निकालने गये समीप के गांव के 5 युवकों में से 3 की मौत हो गई। जबकि 2 गंभीर रूप से घायल है जिनका इलाज चल रहा हैं। ये सभी ओबी की मिट्टी धसकने के फलस्वरूप मिट्टी के नीचे गुरुवार को दब गए थे। दो युवक की मृत्यु घटना स्थल पर हो गई जबकि तीसरे ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
हादसे की जानकारी लगते ही पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन राज्य आपदा प्रबंधन टीम के साथ शुरू किया गया। स्थानीय लोगों ने भी इसमें मदद की।
कोरबा जिला कलेक्टर अजीत वसंत, पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी एवं एसईसीएल के अधिकारियों की मौजूदगी में देर रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलता रहा और अंततः अलसुबह 5-6 बजे के मध्य 18 वर्षीय प्रदीप पोर्ते पिता परदेशी ग्राम बम्हनीकोना और 24 वर्षीय शत्रुघ्न कश्यप पिता चमरु कश्यप की लाश को बाहर निकाल लिया गया। वहीं तीसरा लापता ग्रामीण 17 वर्षीय लक्ष्मण पोर्ते 60 फीट नीचे गड्ढे में गिरा मिला। रेस्क्यू टीम को घायल लक्ष्मण का हाथ दिखा और फिर उसे खदान से बाहर निकाल कर विभागीय अस्पताल नेहरू शताब्दी चिकित्सालय भिजवाया गया। वहां से गहन चिकित्सा के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया।
इस घटना को लेकर ग्रामीणों में गहमा-गहमी का माहौल रहा। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे। यहां सुरक्षा के लिए जवान भी तैनात किए गए थे। शव बरामद होने के बाद जहां परिजनों में कोहराम मच गया वहीं गांव वासियों के द्वारा पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की जाने लगी। ग्रामीणों को मौके से हटाने के लिए प्रयास के दौरान पुलिस के साथ झूमा-झटकी भी हुई। इसमें कुछ लोग चोटिल भी हुए हैं।
पिछले दो साल से दीपका खदान का केंवटा डबरी और सुआभोड़ी क्षेत्र के बंद खदान में हुई दुखद घटना की भेंट तीन किशोर चढ़ गए। गंभीर बात यह है कि जब से इस क्षेत्र में प्रबंधन ने उत्खनन बंद किया है, तब से आसपास में रहने वाले ग्रामीण यहां से अवैध रूप से कोयला निकाल रहे हैं।
जानकारी के अनुसार ग्रामवासियो ने हरदी बाजार थाना परिसर का घेराव कर दिया। यहां से हटाए गए तो हरदी बाजार के सरईसिंगार के पास बजरंग चौक पर चक्का जाम शुरू कर दिए। ग्रामीणों की मांग है कि मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिया जाए और पुलिस के साथ झड़प में जो महिलाएं घायल हुई हैं उनका इलाज कराया जाए।
इधर भू-विस्थापित नेता सपुरन कुलदीप ने एसईसीएल प्रबंधन पर खदान क्षेत्र में सुरक्षा उपायों की नजरअंदाजी करने का आरोप लगाते हुए पीड़ित परिवारों को 20-20 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की है।

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