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कैबिनेट की हरी झंडी आम राय के लिए विधेयक भेजा जा सकता है जेपीसी को
पहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव होंगे एक साथ
NOW HINDUSTAN. Korba. नई दिल्ली. एक देश-एक चुनाव पर मोदी सरकार एक कदम और आगे बढ़ी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को कैबिनेट बैठक में इससे जुड़े संविधान संशोधन बिल को हरी झंडी मिल गई। सूत्रों के मुताबिक संसद के इसी शीतकालीन सत्र में इसे पेश करने की तैयारी हैं। आम सहमति के लिए बिल को संयुक्त संसदीय कमेटी (जेपीसी) को भेजा जा सकता है। दोनों सदनों से पास होने के बाद यह कानून बनेगा। एक देश-एक चुनाव को 2029 से पहले पूरी तरह धरातल पर उतारने की तैयारी है।
सितंबर में कैबिनेट ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की उच्चस्तरीय कमेटी के एक साथ चुनाव कराने के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। एक देश-एक चुनाव को दो चरणों में लागू करने की तैयारी है। पहले चरण में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होंगे। इसके 100 दिन के अंदर दूसरे चरण में नगर पालिकाओं और पंचायतों के चुनाव कराना प्रस्तावित है। गौरतलब है कि बुधवार को कोविंद ने कहा है कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर आम सहमति बनानी चाहिए। यह मामला किसी एक दल का नहीं, बल्कि पूरे देश के हित में है।
चुनाव साथ कराने चुनाव स के लिए राज्यों की मंजूरी अनिवार्य नहीं
लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए राज्यों की मंजूरी अनिवार्य नहीं है। रामनाथ कोविंद कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया कि अनुच्छेद 83 (संसद के सदनों की अवधि), अनुच्छेद 172 (राज्य विधानमंडलों की अवधि) में संशोधन करते हुए अनुच्छेद 82 को अंतः स्थापित किए जाने के लिए संविधान संशोधन बिल लाया जाएगा। इसके लिए राज्यों के समर्थन की आवश्यकता नहीं है।
शेष कार्यकाल के लिए होगा मध्यावधि चुनाव
अगर संसद् या विधानसभा पूर्ण कार्यकाल से पहले भंग हो जाती है तो चुनाव को मध्यावधि चुनाव माना जाएगा। पांच साल के कार्यकाल के बाद होने वाले चुनाव को आम चुनाव माना जाएगा। मध्यावधि चुनाव शेष बचे कार्यकाल के लिए होगा, न कि अगले पांच साल के लिए।
विधानसभाओं का कार्यकाल घटेगा या बढ़ेगा
1•राजस्थान, एमपी, छत्तीसगढ़ का कार्यकाल 2028 तक है। इनके कार्यकाल को 2029 में लोकसभा चुनाव तक बढ़ाया जा सकता है।
2 उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, पंजाब, गोवा और मणिपुर विधानसभाओं का कार्यकाल 2027 तक है। यहां 2027 में चुनाव हुए तो अगला कार्यकाल 2029 तक स्वतः समाप्त हो जाएगा।
3 एक देश एक चुनाव की व्यवस्था लागू होने के बाद विधानसभाओं का कार्यकाल लोकसभा के पूर्ण कार्यकाल की समाप्ति पर ही खत्म होगा। भले गठन किसी भी समय क्यों न किया गया हो।
अब देखना है कि यह बिल शीतकालीन सत्र में ध्वनि मत से पारित होता है कि नहीं।

