जिले में कई ऐसे पहाड़, जिसका ऐतिहासिक महत्व, पुटका पहाड़ में 300 से अधिक दुर्लभ जड़ी-बूटियां मौजूद तो चैतुरगढ़ छत्तीसगढ़ का कश्मीर….

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
3 Min Read

NOW HINDUSTAN.  कोरबा जिलान्तर्गत जंगल के बीच ऊंचे पहाड़ों का हमारे जीवन में बड़ा महत्व है। पहाड़ सभी जानवरों और पौधों की एक चौथाई आबादी का पर भी है। इससे हमें मीठे पानी के साथ कई तरह की दुर्लभ जड़ी-बूटियां भी मिलती हैं। शुद्ध हवा और पानी का यह एक बड़ा स्रोत भी है। जिले में भी चैतुरगढ़, मड़वारानी, पुटका पहाड़, कोसगाई, मानगुरु, करेला पहाड़ का अपना ही महत्व है। ये पहाड़ धार्मिक और पुरातात्विक महत्व के भी हैं। पहाड़ पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हर साल 11 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस मनाया जाता है। जिले के प्रमुख पहाड़ों में अधिक चर्चा चैतुरगढ़ की होती है। इसे छत्तीसगढ़ का कश्मीर कहा जाता है। इसका एक प्रमुख कारण गर्मी के समय भी पहाड़ ऊपर का तापमान 30 डिग्री से ऊपर नहीं जाना है। यहां ऐतिहासिक किला, मां महिषासुर मर्दिनी मंदिर, शंकर खोला गुफा और जंगल का विहंगम दृश्य नजर आता है।

- Advertisement -

पहाड़ों को भी संरक्षित करने की जरूरत

पर्यावरणविद् दिनेश कुमार का कहना है कि हमारे जिले के पहाड़ों में जैव विविधता है। छोटी-छोटी नदी और नाले इन्हीं पहाड़ों से निकले हैं, जो हमें शुद्ध पानी और हवा देते हैं। पर्यावरण की दृष्टि से इन्हें बचाने के लिए संरक्षित करने की जरूरत है। पहाड़ों के ऊपर जाकर कचरा नहीं फैलाना चाहिए। साथ ही वन्य प्राणियों पर इसका प्रभाव न पड़े, इसके लिए भी काम करने की जरूरत है।

# जिले के ये भी प्रमुख पहाड़, जहां पहुंच रहे पर्यटक
* कोसगाई पहाड़

कोसगाई देवी मंदिर की वजह से प्रसिद्ध है। जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर पहाड़ की ऊंचाई समुद्र तल से 1570 फीट है। इसके आगे के हिस्से को लोग लामपहाड़ भी कहते हैं।

* पवन अक्षता

यह पहाड़ रजगामार से 15 किलोमीटर उत्तर पूर्व पर स्थित है। इसकी समुद्र तल से ऊंचाई 2000 फीट है। यहां भी कई स्तंभों में वैज्ञानिक लेखन पाया गया है।

* कोला पहाड़

यह पहाड़ पुटका पहाड़ के बाजू में ही है, जो श्यांग के किनारे तक पहुंचता है। यहां पहाड़ी कोरवा जनजाति के लोग रहते हैं। यहां कई दुर्लभ जड़ी-बूटी के साथ ही जंगली जानवर पाए जाते हैं।

* मानगुरु पहाड़

यह पहाड़ जिले के कटघोरा-अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग से लगा हुआ है। यहां लंबे समय तक हाथी भी रुकते हैं। कई जंगली जानवरों का यह रहवास क्षेत्र है। पहाड़ के ऊपर ही कई बस्तियां भी है। यहाँ से कई झरने निकले हैं।

* मड़वारानी पहाड़

कोरबा-चांपा मुख्य मार्ग पर पहाड़ के ऊपर मां मड़वारानी का मंदिर भी है। इसका एक छोर हसदेव नदी से लगा हुआ है। इसके साथ ही यहां भालु, हिरण, बंदर सहित कई प्रजाति के जंगली जानवर भी पाए जाते हैं।

Share this Article