दस दिवसीय निशुल्क प्रकृति परीक्षण, रक्त शर्करा जांच, रक्तचाप जांच एवं प्रकृतिनुसार आहार-विहार-विचार परामर्श एवं उपचार शिविर…….

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. Korba. देश का प्रकृति परिक्षण” अभियान कोरबा जिला के सह समन्वयक डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा करेंगे श्री शिव औषधालय में प्रकृति परीक्षण।*

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आयुष मंत्रालय भारत के “देश का प्रकृति परिक्षण” अभियान के अंतर्गत” दिनाँक 15 दिसंबर 2024 रविवार से दिनाँक 25 दिसंबर 2024 बुधवार तक दस दिवसीय निशुल्क प्रकृति परीक्षण, रक्त शर्करा जांच, रक्तचाप जांच एवं प्रकृतिनुसार आहार-विहार-विचार परामर्श एवं उपचार शिविर का आयोजन “देश का प्रकृति परिक्षण” अभियान के प्रांतीय संयोजक छत्तीसगढ़ आयुर्वेद यूनानी प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड के रजिस्ट्रार डॉ.संजय शुक्ला जी के निर्देशन में कोरबा जिला आयुर्वेद अधिकारी कोरबा के मार्गदर्शन में “देश का प्रकृति परिक्षण” अभियान कोरबा जिला के समन्वयक डॉ.पवन कुमार मिश्रा एवं सह समन्वयक डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा के नेतृत्व में श्री शिव औषधालय निहारीका में प्रतिदिन प्रात: 10 बजे से आयोजित कीया गया है। “देश का प्रकृति परिक्षण” अभियान के विषय मे अभियान के सह समन्वयक डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया की आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार को सर्वव्यापी एवं सर्वस्पर्शी करने हेतु भारत के आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव जी द्वारा आयुर्वेद क्षेत्र मे शोध के साथ ही आयुर्वेद के बारे में जन जागृति करने हेतु “देश का प्रकृति परिक्षण” अभियान पूरे देश में चलाया जा रहा है। उसी तारतम्य में दिनाँक 15 दिसंबर 2024 रविवार से दिनाँक 25 दिसंबर 2024 बुधवार तक दस दिवसीय निशुल्क प्रकृति परीक्षण, रक्त शर्करा जांच, रक्तचाप जांच एवं प्रकृतिनुसार आहार-विहार-विचार परामर्श एवं उपचार शिविर का आयोजन श्री शिव औषधालय निहारीका में प्रतिदिन प्रात: 10 बजे से आयोजित कीया जा रहा है। जिसमें व्यक्ती अपनी प्रकृति (वात-पित्त-कफ) को जानकर उसके अनुरूप अपनी प्रकृति अनुसार आहार-विहार-विचार, दिनचर्या एवं ऋतुचर्या का पालन कर निरोगी एवं आनंदित जीवन जी सकता है,।

आयुर्वेदानुसार स्वस्थ की परिभाषा है। प्रकृति और ब्रह्मांड के संबंध के विषय में बताते हुये डॉ.नागेन्द्र नारायण शर्मा ने कहा की जिस तरह से पूरी सृष्टि का निर्माण पंचमहाभूत (आकाश-वायु-अग्नि-जल-पृथ्वी) से हुआ है, उसी तरह हमारा शरीर भी पंचभौतिक (आकाश-वायु-अग्नि-जल-पृथ्वी) है। और जो तीन दोषों वात-पित्त-कफ से हमारी प्रकृति का निर्माण होता है वह दोष भी अलग अलग महाभूतों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस तरह प्रकृति परीक्षण के माध्यम से हम अपनी प्रकृति को जानकर इस पंचमहाभूतात्मक सृष्टि से अपनी प्रकृति अनुसार आहार विहार कर स्वस्थ व आनंदित जीवन जी सकते हैं।
*अपना प्रकृति परीक्षण करा अपनी प्रकृति जानकर।*
*प्रकृति अनुसार करें आहार-विहार-विचार और व्यवहार।।*
*पायें निरोगी-सुखी और आनंदित जीवन का उपहार।*
*यही है वैश्विक स्वास्थ्य के लिये आयुर्वेद का नवाचार।।*
“देश का प्रकृति परिक्षण” अभियानकोरबा जिला के सह समन्वयक डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने अंचलवासियों से अधिक से अधिक संख्या मे अपनी प्रकृति परीक्षण कराकर “देश का प्रकृति परिक्षण” अभियान के इस दस दिवसीय विशेष शिविर का लाभ उठाने की अपील की है। इस शिविर के विषय मे प्रकृति परीक्षण कराने एवं शिविर का लाभ उठाने हेतु मोबाइल नंबर 9826111738 पर संपर्क कर निर्धारित समय प्राप्त कर असुविधा से बचा जा सकता है।

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