NOW HINDUSTAN. कोरबा जिले के ग्रामीण इलाकों में जमीन को लेकर जमकर खेला हो रहा है । मसहती गांव के नाम पर जमीन दलाल जमकर खेल खेल रहे हैं । हम बात कर रहे हैं बालको से सतरेंगा जाने वाले मार्ग की । ग्राम पंचायत जामबहार से लेकर अजगर बहार के बीच सड़क किनारे जंगल की । उस जमीन पर जहां आज बड़े-बड़े निर्माण कार्य चल रहे हैं। खासकरग्राम पंचायत चुहिया से लेकर अजगर बहार के बीच जमीन दलाल मसहती गांव होने का फायदा उठाकर जंगल की बेशकीमती जमीन को कहीं भी सेट कर ऊंचे दम में बेचकर उसे पर कब्जा करा रहे हैं। हरे भरे बड़े पेड़ पौधों को भी नही बक्सा जा रहा है ।
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जिला प्रशासन के साथ वन विभाग को इसका पता ही नहीं है या फिर सभी चुपचाप है। यहां जमीन एक डिसमिल है तो दो डेसिमल बन जाती है 50 डिसमिल है तो एक एकड़ बन जा रही है । और जंगल की जमीन पर ही खुदाई करके मिट्टी निकालकर समतलीकरण किया जा रहा है । कहीं ना कहीं तहसीलदार पटवारी की उदासीनता की वजह से जंगल की बेशकीमती जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। पुराने पेड़ों को काटकर गायब कर दिया गया है।
ये नजारा आप खुद भी देखा सकते है कि किस प्रकार से काम चल रहा है। कुछ वर्ष पहले जब चुहिया से अजगर बहार के रास्ते पर कोई निकलता था तो चारों ओर घने जंगल दिखाई देते थे लेकिन आज उन जमीनों पर बड़े-बड़े प्लॉट्स दिखाई दे रहे हैं। जो कहीं ना कहीं भू माफियाओं के होने संकेत देते हैं। कोरबा कलेक्टर को चाहिए कि ऐसे भूमि माफिया के जमीनों की जांच करें जो आज मसहती गांव का फायदा उठाकर कहीं-की भी जमीन को कहीं भी सेट कर रहे हैं।
यह भी देखने में आ रहा है कि किसानों को खेती करने के किये दी गई वन अधिकार पट्टे की जमीन को भी एक के बाद कई व्यक्तियों को बेचकर उसका नंबर बनाकर उसे सेट कर दिया जा रहा है। ऐसा ही चलाता रहा तो एक जो घने जंगल आज लोगों के आकर्षण का केंद्र है वहां पर सिर्फ बड़े-बड़े प्लॉट दिखाई देंगे।
जब से सतरेंगा को पर्यटन स्थल घोषित किया गया है तब से भू माफियाओं के ध्यान भी ओर गया है । गौर करने वाली बात है कि इस रास्ते सभी अधिकारी आते जाते रहते है और किसी का ध्यान नही जाता है । वही गांव वालों का कहना है कि सब कुछ सेटिंग से चल रहा है ।।

