आज शाम थम जाएगा चुनाव प्रचार, प्रत्याशियों ने वार्डों में निकाली रैली, हाथ जोड़कर मांगे वोट, 66 वार्डों में 277 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला, 11 फरवरी को डाले जाएंगे मत…

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. कोरबा. नगर निकाय चुनाव के लिए आज शामपांच बजे प्रचार खत्म हो रहा है। लेकिन प्रत्याशी डोर-टू-डोर जाकर संपर्क कर सकेंगे। आखिरी दौर में प्रचार अपने चरम पर है और उम्मीदवार अपनी जीत को लेकर हर रणनीतिक दांव खेल रहे हैं।

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निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज है। अलग-अलग वाडाँ में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है। कुछ जगहों पर निर्दलीय प्रत्याशी दोनों प्रमुख दलों के उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। शनिवार को उम्मीदवारों ने दिनभर प्रचार किया। अलग-अलग क्षेत्रों में प्रत्याशियों ने रैली का आयोजन किया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। अपनी जीत को सुनिश्चित करने के लिए रैली में शामिल समर्थक प्रत्याशियों के पक्ष में नारे लगाते देखें । वही प्रत्याशी अपने चुनाव वाहन के साथ आगे-आगे चल रहे थे। महिलाएं इसके पीछे। कई क्षेत्रों में बच्चे भी प्रचार-प्रसार का हिस्सा बने और उन्होंने अपनी साइकिलों पर राजनैतिक दलों का झंडा लगाया हुआ था। प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित हो सके, इसके लिए संबंधित वाडों में महिला एवं पुरुषों की कई टीमें काम कर रही हैं। यह टीम वार्ड के जिस हिस्से में जा रही है। उसमें उसी इलाके के लोगों को प्रमुखता से शामिल किया गया है। खासकर ऐसे लोगों को जिसमें उनकी पकड़ मजबूत हो। भाजपा, कांग्रेस के वार्ड प्रत्याशी अपने लिए तो वोट मांग ही रहे हैं। अपनी पार्टी की ओर से घोषित महापौर की प्रत्याशी के लिए वोट देने की भी अपील कर रहे हैं। इसके लिए डमी पर्ची दिखा रहे हैं और बता रहे हैं कि उनके और उनके महापौर प्रत्याशी का क्रमांक ईवीएम किस स्थान पर है और किस तरीके से वोट किया जाए? ताकि प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित हो सके। छोटी-छोटी नुक्कड़ सभाएं भी हो रही है। जिसमें महापौर पद के प्रत्याशी एक स्थान पर लोगों को संबोधित कर रहे हैं और लोगों को अपनी प्राथमिकताएं बता रहे हैं।

इस बार कोरबा नगरीय निकाय अंतर्गत स्थित 67 वार्डों में से 66 पर चुनाव हो रहा है और इसके लिए वोट 11 फरवरी को डाले जाएंगे। मतदान सुबह आठ बजे से शुरू होगा, जो शाम पांच बजे तक जारी रहेगा। इस अवधि में संबंधित वार्ड के मतदाताओं को अपने पास के मतदान केंद्र पर जाकर वोट डालने होंगे।

चुनाव में कई लोगों की प्रतिष्ठा दांव पर

नगर निकाय चुनाव में कई लोगों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। इसमें भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस के नेता भी शामिल हैं। जीत के लिए पसीना बहा रहे हैं और अपने वार्ड में मतदाताओं से मिलकर वोट मांग रहे हैं। दिग्गज नेता अपनी प्रतिष्ठा संचा पाते हैं या नहीं। यह जनता 11 फरवरी को तय करेगी। इस बार नगरीय चुनाव के लिए मतदान से पांचवे दिन 15 फरवरी को वोटों की गिनती हो रही है। महापौर के लिए मुख्य मुकाबला भाजपा प्रत्याशी संजू देवी राजपूत और कांग्रेस प्रत्याशी उषा तिवारी के बीच है। प्रचार के अंतिम दौर में दोनों ने पूरी ताकत लगा दी है।

जीत के लिए कई वार्डों में मतदाताओं को प्रलोभन देने में जुटे प्रत्याशी, नकद भी बांटने की कोशिश

जीत के लिए प्रत्याशी हर दांव-पेंच अपना रहे है, ताकि वे अपने वार्ड का प्रतिनिधित्व नगर निगम में कर सकें। निगम क्षेत्र के कई वार्डों में सामूहिक भोज कराने का दौर पहले से ही चल रहा था। अब जब चुनाव प्रचार खत्म होने की ओर है तब उम्मीदवार अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं और वोट के लिए उम्मीदवारों को प्रलोभन दे रहे हैं। कुछ हिस्से की स्लम बस्तियों में ऐसे वोटरों की भी सूची तैयार कर रहे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हैं। प्रत्याशियों को लगता है कि इन्हें प्रलोभन या इनकी जरूरत के अनुसार सामाग्री वा रुपए देकर वोट को अपने पक्ष में किया जा सकता है। इसे देखते हुए कुछ क्षेत्रों में उम्मीदवारों ने सूची तैयार की है। हालांकि अभी किसी क्षेत्र से उम्मीदवारों को प्रलोभन देने से संबंधित शिकायतें प्रशासन को नहीं मिली है। जिससे कार्रवाई किया जा सका। कुछ क्षेत्रों में तो चुनाव खर्च के नाम पर प्रत्याशियों को भारी-भरकम धन की व्यवस्था भी कराई जा रही है। ये रुपए नकद के रुप में पहुंचाए जा रहे हैं।

हराने के लिए कई वार्डों में बने गुट, पूर्व में हारे प्रत्याशी भी पुराना हिसाब-किताब चुकता करने की तैयारी में

नगर निकाय चुनाव को लेकर एक वार्ड में कई गुट बन गए हैं। ये गुट अलग-अलग राजनैतिक या निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ ताल्लुक रखते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में डेढ़ दर्जन ऐसे वार्ड हैं, जहां पूर्व में हारे हुए प्रत्याशी इस बार चुनाव तो नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन जिससे वे हारे थे। उसे हराने के लिए अपने विरोधियों के साथ हाथ मिला लिया है और और अपने प्रतिद्वंदियों को वार्ड में मात देने के लिए बनाए जा रहे रणनीति का हिस्सा बन गए हैं । शहर में एक वार्ड ऐसा भी है जहां पूर्व में कांग्रेस के टिकट पर हारे प्रत्याशी भाजपा की उम्मीदवार के साथ दे रहे हैं। और इस आशय की जिससे वे हरा दें। एसईसीएल के कुछ वाडों में कांग्रेस की टिकट पर हार चुके प्रत्याशी इस बार निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं और कांग्रेस के  प्रत्याशी को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। कांग्रेस ना तो बागी उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई कर पा रही है और ना ही उन्हें समझाकर नामांकन वापस करा सकी है।

 

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