राखड़ से प्रभावित लोगों ने किया प्रदर्शन, प्रदर्शन के बाद प्रबंधन ने दिया लिखित आश्वासन, तत्काल छिड़काव और मेडिकल सुविधा का वादा……..

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. Korba. कोरबा को काले हीरे की धरती ऐसे ही नही कहा जाता है । यहां कोयले की सबसे बड़ी खदान है । और खदान से निकलने वाले कोयले से विधुत बनता है । सयंत्रो से राखड़ का उत्सर्जन होता है । यही राख पूरे कोरबा में देखी जा सकती गई। एचटीपीएस पावर प्लांट के नवागांव-झाबू राखड़ डेम से उड़ने वाली राखड़ से त्रस्त ग्रामीणों ने गुरुवार को प्रदर्शन किया। राखड़ के प्रदूषण से सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और बीमारियों की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने राखड़ परिवहन करने वाले वाहनों को रोक दिया और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।

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लगभग चार घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद प्रबंधन के उच्च अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान करने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त किया।

ग्रामीणों का कहना है कि हर बार जब राख उड़ती है। तो प्रबंधन अपने वादे लेकर पहुच जाता है । लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही। पिछली बार कटघोरा के तत्कालीन विधायक पुरुषोत्तम कंवर भी ग्रामीणों के समर्थन में पहुंचे थे, तब प्रबंधन ने सड़क मरम्मत सहित कई विकास कार्यों का आश्वासन दिया था। लेकिन जो सड़क बनाई गई, उसकी गुणवत्ता इतनी खराब थी कि कुछ ही महीनों में उखड़ने लगी और अब सड़क के बीचो-बीच दरारें आ गई हैं। ग्रामीणों ने इसे सिविल विभाग की लापरवाही और गुणवत्ताहीन कार्य का नतीजा बताया।

इस बार ग्रामीणों ने प्रबंधन से सिर्फ जुबानी वादे नहीं, बल्कि लिखित आश्वासन की मांग की, ताकि यदि प्रबंधन अपने वादों से मुकरता है, तो ग्रामीण इसे प्रमाण के रूप में पेश कर सकें। लगातार विरोध को देखते हुए एचटीपीएस प्रबंधन के अधिकारी राजेश पांडे ने मौके पर ही कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए – जिसमें राखड़ डेम में पानी छिड़काव के लिए तत्काल संयंत्र के फायर दमकल वाहन को बुलवाया गया और छिड़काव शुरू कराया गया।

ग्रामीणों की स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए डॉक्टर और एंबुलेंस की व्यवस्था की गई, ताकि राखड़ से प्रभावित लोगों को तुरंत इलाज मिल सके। हर बुधवार को गांव में मेडिकल कैंप लगाने की घोषणा की गई, जिसमें डॉक्टर मुफ्त इलाज करेंगे और दवाएं दी जाएंगी। वही गांव के बच्चों ने भी रखड़ की समस्या को लेकर अधिकारियों का घेरा कर दिया।

राखड़ उड़ने से प्रभावित ग्रामीणों को हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी।

गांवों की जर्जर हो चुकी सड़कों की जल्द मरम्मत की जाएगी।

स्कूलों में विशेष सुरक्षा उपाय किए जाएंगे, ताकि बच्चों पर राखड़ का असर कम से कम हो।

प्रबंधन के अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि राखड़ प्रदूषण रोकने के लिए वैकल्पिक उपायों पर भी विचार किया जाएगा। एनटीपीसी की तर्ज पर भरपाई की मांग, प्रबंधन ने मांगा आदेश पत्र

ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई कि एनटीपीसी की तरह प्रत्येक राशन कार्डधारी ग्रामीण को प्रभावित क्षेत्र होने के कारण आर्थिक सहायता दी जाए।

इस पर प्रबंधन के अधिकारियों ने जवाब दिया कि
“यदि ग्रामीण हमें एनटीपीसी में लागू आदेश की कॉपी उपलब्ध कराते हैं, तो हम इसे उच्च अधिकारियों के समक्ष रखकर इस पर चर्चा करेंगे।”

स्कूलों का निरीक्षण, बच्चों की खराब स्थिति देख अधिकारियों ने दिए निर्देश । प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रबंधन अधिकारियों से प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों का निरीक्षण कराने की मांग की।

जब अधिकारियों ने स्कूल का दौरा किया तो बच्चों की बिगड़ती हालत देखकर वे हैरान रह गए। ग्रामीणों ने बताया कि –
“राखड़ के कारण छोटे बच्चे बीमार हो रहे हैं, लेकिन स्कूलों में कोई विशेष सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं।” इस पर अधिकारियों ने स्कूल परिसर में नियमित पानी छिड़काव और सफाई कराने का आश्वासन दिया।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:

राखड़ डेम पर नियमित पानी छिड़काव किया जाए।

गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई जाएं।

स्कूलों में विशेष सुरक्षा उपाय किए जाएं।

राखड़ के कारण हुए नुकसान की भरपाई की जाए।

एनटीपीसी की तर्ज पर प्रभावित ग्रामीणों को सहायता दी जाए

ग्रामीणों ने साफ कह दिया कि अगर 15 दिनों में प्रबंधन ने अपने वादों को पूरा नहीं किया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।

ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा
“हमने प्रदर्शन तो समाप्त कर दिया, लेकिन यह हमारी अंतिम चेतावनी है। अगर 15 दिनों में समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो हम सीएसईबी प्रबंधन के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे।”

अब देखना होगा कि प्रबंधन अपने वादों पर खरा उतरता है या फिर यह सिर्फ एक और अधूरा आश्वासन बनकर रह जाता है।

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