NOW HINDUSTAN. कोरबा।नेपाल से दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र समझौते के तहत जीरो ड्यूटी पर खाद्य तेल का आयात हो रहा है। कोरबा मार्केट में यह नेपाली तेल मात्र एक सौ पन्द्रह रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। दरअसल यह केवल उत्तरी और पूर्वी भारत में समस्या बन रहा है, बल्कि ये अब दक्षिणी और मध्य भारत में दिक्कतें बढ़ा रहा है। इसी को लेकर कस्टम डिपार्टमेंट (सीमा शुल्क विभाग) द्वारा 18 मार्च को जारी अधिसूचना में निर्यातकों/आयातकों से रियायती शुल्क के तहत आयातित चीजों के लिए “मूल का सर्टिफिकेट” के बजाय “मूल का प्रमाण” देने को कहा है. इस अधिसूचना के बाद सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया को उम्मीद है कि इससे नेपाल और अन्य सार्क देशों से खाद्य तेल के प्रवाह को कम करने में मदद मिलेगी।
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किसानों और सरकार को बड़ा नुकसान
अपने मासिक पत्र में एसईए के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने कहा कि नेपाल से ‘उत्पत्ति के नियमों’ का उल्लंघन करते हुए भारत में रिफाइंड सोयाबीन तेल और पाम तेल की भारी मात्रा में आमद हो रही है. इससे घरेलू रिफाइनरों और तिलहन किसानों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है, जिससे सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि जो कुछ धीरे-धीरे शुरू हुआ था, वह अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. इससे इन क्षेत्रों में वनस्पति तेल रिफायनिंग उद्योग के अस्तित्व को खतरा पैदा हो रहा है, बाजार विकृत हो रहे हैं और खाद्य तेलों पर उच्च आयात शुल्क का मकसद कमजोर हो रहा है। मगर शहर में धूम मचाए हुए है यह तेल और तेल की धार।
सबसे बड़ी बात है कि नेपाल की करेंसी भारत के मुकाबले कमजोर है । यहां जा एक रुपये वहाँ के डेढ़ रुपये के बराबर है । जिस वजह से नेपाल के व्यापारियों को फायदा मिल रहा है।

