NOW HINDUSTAN. कोरबा जिला गौण खनिज संपदा से भरा हुआ है । यही वजह है कि आज कोरबा का नाम पूरे भारत मे एक अलग जगह पर है । कटघोरा में लीथियम की तलाश को लेकर अब बड़ा सर्वे शुरू होने जा रहा है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की उपस्थिति में माइकी साउथ माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड को कंपोजिट लाइसेंस प्रदान कर दिया है। कटघोरा लीथियम ब्लॉक को माइकी साउथ ने 76.05 फीसदी की उच्चतम बोली लगाकर प्राप्त किया है।
- Advertisement -
कटघोरा में चकचकवा पहाड़ी के आसपास लीथियम की मौजूदगी का खुलासा प्रारंभिक सर्वे में हुआ हुआ है। है यह सर्वे केंद्र सरकार की एजेंसी ने किय था। इसके बाद लीथियम ब्लॉक को नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी।। सबसे ऊंची बोली माइकी साउथ माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड ने लगाया था और उसे लीथियम ब्लॉक मिल गया था। इस ब्लॉक में लीथियम का मौजूदा भंडार कितना है यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।
भंडार की मौजूदगी का पता लगाने के लिए माइक साउथ को यहां बड़े पैमाने पर सर्वे की जरूरत है। इसके लिए कंपनी को कंपोजिट लाइसेंस का इंतजार था। इसे प्रदेश सरकार ने पूरा कर दिया है। शुक्रवार को रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की मौजूदगी में माइकी साउथ को कंपोजिट लाइसेंस प्रदान किया गया। इस कंपनी को यह लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी कटघोरा में लीथियम के सर्वे का कार्य व्यापक तौर पर शुरू कर सकेगी। इसके लिए जमीन के भीतर ड्रील लगाया जाएगा और अन्य तकनीकी उपकरणों की मदद से यहां मौजूद भंडार का पता लगाया जाएगा।
धरातली सर्वे में 256 हेक्टेयर भू-भाग में मौजूदगी का चला है पता
कटघोरा में चकचकवा पहाड़ी के आसपास लीथियम का अनुमानित भंडार कितना है यह तो अभी स्पष्ट नहीं हुआ है लेकिन भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग द्वारा किए गए सर्वे में इस क्षेत्र में लगभग 256 हेक्टेयर में लीथियम की मौजूदगी का पता चला है। यह सर्वेक्षण सतही तौर पर किया गया था।
सतह से जो नमूने एकत्र किए गए थे इसकी प्रयोगशाला में जांच कराई गई और वहां लीथियम की मौजूदगी का पता चला। इसके आधार पर केंद्र सरकार ने इस ब्लॉक को आवंटित करने की योजना बनाई और नीलामी के जरिए यह ब्लॉक माइकी साउथ माइनिंग कंपनी को दिया गया है।
सर्वे के बाद चिन्हित होगी जमीन
बताया जाता है कि कंपोजिट • लाइसेंस मिलने के बाद माइकी साउथ माइनिंग कंपनी इस क्षेत्र में सर्वे का काम शुरू करेगी। इसके आधार पर लीथियम की मौजूदगी का पता लगाएगी, फिर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर उस भूखंड को चिन्हित करेगी जहां खनन होना है और इसी आधार पर प्रदेश सरकार की ओर से माइकी साउथ माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। हालांकि इस प्रक्रिया में अभी काफी समय लगने की उम्मीद है।
कई साल पहले टोही विमान के जरिए हुए सर्वे में पहली बार मौजूदगी का चला था पता
कटघोरा क्षेत्र में लीथियम की मौजूदगी का पता कई साल पहले टोही विमान के जरिए हुए सर्वे में पता चला था। इसके बाद सरकार की ओर से सर्वे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया था और जमीन से भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग की टीम ने नमूना एकत्र किया था। इस नमूने की जांच की गई थी और फिर लीथियम की मौजूदगी का पता चला। अब तीसरे चरण में यहां से लीथियम खनन के लिए सरकार ने निजी कंपनी को कंपोजिट लाइसेंस प्रदान किया है। यह सर्वे बेहद महत्वपूर्ण है। इसी आधार पर निजी कंपनी यहां से खनन शुरू होने को लेकर अपनी विस्तृत योजना तैयार करेगी। गौरतलब है कि चकचकवा पहाड़ी के आसपास स्थित गांव घरीपखना, रामपुर और इसके आसपास स्थित गांवों में पहले ही धरातली सर्वे हुआ है।
भविष्य का खजाना है लीथियम
लिथियम को भविष्य का खजाना कहा जा रहा है। दुनियाभर में लिथियम की मांग बढ़ रही है। मोबाइल या लैपटॉप की बैट्री में ही लिथियम का इस्तेमाल नहीं हो रहा है बल्कि इलेक्ट्रीक वाहनों की बैट्री में आजकल इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। भविष्य में चारपहिया गाड़ियों की बैट्री में भी लिथियम का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होने की संभावना है। यही कारण की दुनियाभर में इसकी मांग रही है। आने वाले दिनों में लिथियम बैट्री एक महत्वपूर्ण घटक बनकर उभर सकता है।
लीथियम खनन के लिए सरकार ने निजी कंपनी को कंपोजिट लाइसेंस प्रदान किया है। यह सर्वे बेहद महत्वपूर्ण है। इसी आधार पर निजी कंपनी यहां से खनन शुरू होने को लेकर अपनी विस्तृत योजना तैयार करेगी। गौरतलब है कि चकचकवा पहाड़ी के आसपास स्थित गांव घरीपखना, रामपुर और इसके आसपास स्थित गांवों में पहले ही धरातली सर्वे हुआ है।

