NOW HINDUSTAN. कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र में केंद्र सरकार की बहुचर्चित जल जीवन मिशन योजना पर सवाल खड़े हो गए हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीण आज भी शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं। योजना के तहत हर घर नल कनेक्शन तो दे दिए गए, लेकिन इन नलों से एक बूंद भी पानी नहीं टपका।
स्थानीय निवासी दिलेश्वर मंझवार ने आरोप लगाते हुए बताया कि उनके घर में पिछले साल नल कनेक्शन लगा था, लेकिन अब तक पानी नहीं आया। मजबूरन उन्हें और उनके परिवार को नदी-नालों से पानी लाना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में यह समस्या और विकराल हो गई है। महिलाएं व बच्चे सुबह से ही पानी की तलाश में भटकते हैं, जिससे उनकी स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों प्रभावित हो रही है।
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अन्य ग्रामीणों का भी आरोप है कि योजना केवल कागज़ों पर सफल है, जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। अधूरी पड़ी पाइपलाइन, टूटी हुई टंकियां और सूखे नल इस योजना की असल तस्वीर बयां कर रहे हैं। कई स्थानों पर टंकियां तो बनी हैं, लेकिन उनमें आज तक पानी नहीं भरा गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि वे जल्द से जल्द पेयजल संकट का समाधान करें और संबंधित दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंचे।

