NOW HINDUSTAN. कोरबा जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क पर दो महीने में ही घास उग आई है। यह कोई प्राकृतिक चमत्कार नहीं, बल्कि निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार की खुली किताब है। ग्राम पंचायत मड़ई से कोदवारी तक 4.70 किलोमीटर लंबी यह सड़क लगभग 2 करोड़ 47 लाख रुपए की लागत से बनी, लेकिन इतनी जल्दी घास उग आना दर्शाता है कि डामरीकरण की परत केवल कागज़ों में ही मोटी रही।इस सड़क निर्माण का ठेका रायगढ़ की शांति इंजीनियरिंग को मिला था, जिसके मुख्य ठेकेदार सुनील कुमार अग्रवाल ने कार्य पेटी ठेकेदार चंद्रभान बंजारा को सौंप दिया।
- Advertisement -
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण शुरू होने से पहले रास्ते किनारे की पक्की साइड सोल्डर तोड़ दी गई, और उसके नाम पर नई सोल्डर बनाने की आड़ में सीमेंट, रेत और गिट्टी लाई गई, जिसे बाद में उसे बेचने की कोशिश की गई। ग्रामीणों के विरोध के चलते गिट्टी तो नहीं बिक सकी, पर ठेकेदार मौके से भाग खड़ा हुआ। स्थानीय युवाओं में इस भ्रष्टाचार को लेकर खासा गुस्सा है। उनका कहना है कि जो बातें वे किताबों में पढ़ते थे, अब उन्हें अपनी आंखों के सामने घटते देख रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की मॉनिटरिंग न के बराबर है। कागजों पर सब ठीक दिख रहा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।ग्रामीणों ने कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत से मांग की है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर इस भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जाए।
अब देखना यह है कि उगी घास की तरह यह मामला भी दबा दिया जाएगा या फिर कोई साफ-सुथरी कार्रवाई होगी! जिस तरह से विभागों से फाइल गायब हो जाती है कही उसी तरह से घास भी गायब ना हो जाये ।

