NOW HINDUSTAN. Korba. गर्मी के अंत और बरसात के शुरुआत मे पाया जाने वाला फल कोसम फल (Kosam Fruit), जिसे आमतौर पर *कुसुम* (Schleichera oleosa) के नाम से जाना जाता है, भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाने वाला एक उष्णकटिबंधीय फल है। यह सपोटेसी (Sapotaceae) परिवार से संबंधित नहीं है, बल्कि यह सैपिंडेसी (Sapindaceae) परिवार का है, जिसमें लीची और रम्भूतन जैसे फल भी शामिल हैं। इसे स्थानीय भाषाओं में कुसम, कोसम, या लाकुचा (Lacucha) के नाम से भी जाना जाता है।
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कोसम फल के बारे में जानकारी:
1. स्वरूप और स्वाद- कोसम का फल छोटा, गोल, और आमतौर पर हरा होता है, जो पकने पर लाल या बैंगनी रंग का हो जाता है।
– इसका स्वाद खट्टा-मीठा होता है, और इसे कच्चा या पकाकर खाया जाता है।
– फल के अंदर एक गूदा होता है, जिसमें एक या दो बीज होते है यह फल खासकर गर्मी के मौसम में पाया जाता है। इसके बीज से तेल भी निकाला जाता है।
2. उपयोग– खाद्य
कोसम के फल को कच्चा खाया जाता है, अचार बनाया जाता है, या चटनी में इस्तेमाल किया जाता है।
– औषधीय उपयोग :- आयुर्वेद में इसके फल, पत्तियों, और तेल का उपयोग विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं जैसे पाचन, त्वचा रोग, और सूजन के इलाज में किया जाता है।
– तेल :- इसके बीजों से निकलने वाला तेल, जिसे *कुसुम तेल* कहते हैं, पारंपरिक रूप से त्वचा और बालों के लिए उपयोग होता है। यह तेल “मैकासर तेल” के नाम से भी जाना जाता है।

3. पोषण :- कोसम फल में विटामिन सी, एंटीऑक्सिडेंट्स, और फाइबर प्रचुर मात्रा में होते हैं।
– यह पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।
4. वितरण और खेती :- यह फल भारत के जंगलों, विशेष रूप से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, और पूर्वोत्तर राज्यों में प्राकृतिक रूप से उगता है।
– इसे बगीचों में भी उगाया जा सकता है, लेकिन यह मुख्य रूप से जंगली फल के रूप में जाना जाता है।
5. सांस्कृतिक महत्व :- कई आदिवासी समुदाय कोसम के फल और इसके पेड़ का उपयोग भोजन, औषधि, और लकड़ी के लिए करते हैं।
– इसके पेड़ का उपयोग लकड़ी और छाया प्रदान करने के लिए भी होता है।
6 उपलब्धता :-कोसम फल मुख्य रूप से मानसून और उसके बाद के मौसम जून से अगस्त माह में उपलब्ध होता है। इसे स्थानीय बाजारों में या जंगली क्षेत्रों में आसानी से पाया जा सकता है।

