सीएसईबी का फूटा राखड़ बांध-ग्रामीणों मे दहशत , ग्राम में घुसा राखड़……

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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NOW HINDUSTAN. Korba.  जानकारी के अनुसार कटघोरा तहसील के ग्राम डिंडोलभाटा स्थित छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल (सीएसईबी) का राखड़ बांध अलसुबह टूट गया। जिसके कारण राखड़ बहकर ग्राम में घुस गया। घटना की सूचना पर मौके पर पहुंचे पुलिस-प्रशासनिक अमला ग्राम को खाली कराने में जुटा। ग्राम में घुसने पर लोग जान बचाते हुए घर छोड़कर भागे।

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बताया जा रहा हैं की सीएसईबी का राखड़ डैम जून माह की पहली बारिश से ही गुरुवार की दोपहर भरभराकर टूट गया, डैम के टूटते ही हजारों टन राखड़ किसानो के खेत मे समाते हुए बस्ती मे पहुँच रहा है, जिसने साफ दिख रहा हैं की सीएसईबी प्रबंधन की लापरवाही से देखरेख का अभाव बना हुआ था। इसी वजह से पहली बारिश मे ही विशालकाय राखड़ बाँध टूट गया। बाँध के अचानक टूटने से तेज आवाज़ के साथ राखड़ की बहती धार ने ग्रामीणों किसानो की चिंता बढ़ा दी है, वही आसपास के ग्रामवासी सीएसईबी प्रबंधन के खिलाफ आक्रोशित हैं।

ग्रामीणों के अनुसार राखड़ बांध गुरुवार की alसुबह से लीकेज था, लीकेज की सूचना के बाद भी सीएसईबी प्रबंधन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी झाँकने तक नही पहुंचा। देखते ही देखते करीब 12 बजे 100 मीटर तक तटबंध टूट गया, बांध टूटने से राखड़ तेज गति से खेत खार होते हुए ढिंढोलभांठा के आश्रित ग्राम डोडकधरी के किनारे तक पहुंच गया, ग्रामीणों की सूचना के 4 घंटे बाद करीब 5 बजे सीएसईबी के अधिकारी घटना स्थल पहुंचे और सभी ग्रामीणों को गाँव खाली करा दिया।

* 44 ग्रामीणों को ठहराया सामुदायिक भवन मे

राखड़ बांध टूटने के बाद बस्ती की ओर बहते राखड़ को देख सभी डर गए, अधिकारियों ने ग्राम डोडकधरी के सभी ग्रामीणों को ग्राम ढिंढोलभांठा के सामुदायिक भवन मे ठहराया, सामुदायिक भवन मे करीब 44 लोगों ने डर के साये मेंरात गुजारी।

* बोरी से टूटे बांध को बांधने का प्रयास जारी

राखड़ बांध का 100 मीटर से बड़ा एरिया टूट गया है जिसे बोरी मे राखड़ और मिट्टी रेत से भरकर टूटे बांध को बांधने का प्रयास कर रहे हैं, बोरी से टूटे बांध को बंद करने सीएसईबी के इस प्रयास से ग्रामीणों मे नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है की टूटे हुए बांध को सही तरीके से बनाया जाए ताकि दुबारा घटना घटित न हो, वहीं अधिकारी बोरी से सब ठीक हो जाने की बात कर रहे हैं। बताया जा रहा हैं की पर्यावरण विभाग से कोई भी अधिकारी जायजा लेने नही पहुंचे हैं। इससे पहले भी कुछ वर्ष पूर्व एनटीपीसी का धनरास राखड़ बाँध बारिश में ढा गया था। जिससे लाखों टन राख हसदेव नदी में प्रभावित हो गई थी। रखड़ बंद तो बना दिए गए हैं लेकिन रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है यही वजह है कि बारिश के दौरान बांध का तटबंध टूट जाता है और रख आसपास के क्षेत्र में फैल जाता है अब इसे  अधिकारी की लापरवाही कहें या फिर भ्रष्टाचार का एक प्रमुख जरिया बन गया है ।

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