NOW HINDUSTAN. Korba. सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया की अनुसांगिक कंपनी एसईसीएल बिलासपुर के अधीन कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित खुले मुहाने की गेवरा कोयला परियोजना अंतर्गत एसईसीएल की मेगा कुसमुंडा परियोजना द्वारा खदान विस्तार के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के खिलाफ भू-विस्थापितों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर बड़ी संख्या में प्रभावित परिवारों ने सुभाष चौक पहुंचकर एसईसीएल प्रबंधन का पुतला दहन किया और कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया।
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आरोप लगाते हुए बताया जा रहा हैं की कुसमुंडा क्षेत्र में ग्राम दनेपाली, पढ़ानिया, चंद्रनगर सहित कई ग्रामो की कृषि भूमि को एसईसीएल ने खदान विस्तार के लिए अधिग्रहित किया है। लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन लिए जाने के बावजूद न तो उन्हें रोजगार मिला और न ही बसाहट या समुचित मुआवजा दिया गया। इस वजह से प्रभावित परिवारों को आजीविका चलाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब सैकड़ों की संख्या में भू-विस्थापित सुभाष चौक से नारेबाजी करते हुए कलेक्टरेट कार्यालय की ओर बढ़े। यहां उन्होंने मुख्य गेट पर प्रदर्शन करते हुए घेराव किया। इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हल्की झड़प की भी सूचना है।
बीते कुछ महीनों से लगातार एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन तेज होता जा रहा है। प्रभावितों की मांग है कि उन्हें तत्काल नौकरी, बसाहट और उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि वे अपने परिवार का जीवन यापन कर सकें।

