सिंचाई विभाग ने बांधों के गेटों की मरम्मत का नहीं बनाया एस्टीमेट , – सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा की टीम ने फतेहपुर सीकरी का किया अध्यन…….

Rajesh Kumar Mishra
Rajesh Kumar Mishra
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तेरहमोरी बांध जल संचय उपयुक्त बनाया जाना सामायिक जरूरत

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NOW HINDUSTAN. Korba. पानी की किल्लत से जूझते आगरा जनपद के सबसे अधिक प्रभावित फतेहपुर सीकरी क्षेत्र को समस्या से निजात दिलाने में अकबर कालीन तेरह मोरी बांध अब भी उपयोगी है,बशर्त बांध को पुन:जलसंचय उपयुक्त बनाया जा सके।बांध का ऐतिहासिक महत्ता और हेरिटेज श्रेणी का होना अपनी जगह महत्वपूर्ण है किंतु अब यह सीकरी के जनजीवन की सर्वोच्चता वाली सामायिक जरूरत है।
उ प्र सिंचाई विभाग के प्रबंधन वाला यह बांध जनपद का सबसे ज्यादा जल संचय क्षमता का है किंतु उपेक्षा के कारण पिछले 40 साल से निष्प्रोज्य स्थित में है।महज क्षतिग्रस्त सुल्यूस गेट (Sulus Gate) और उनके ढांचे में सुधार कर इस जलसंचय और नियंत्रित प्रवाह की स्थिति वाले बांध की स्थिति में लाया जा सकता है।

जिले के सबसे बडे बांध में मानसून काल में पानी संचय और बाद में किसानों की जरूरत के अनुरूप डिस्चार्ज करने मात्र की पूर्व प्रचलित व्यवस्था शुरू हो जाने मात्र से न केवल भूजल स्तर सुधरेगा,बल्कि राजस्थान की ओर से ग्रीष्मकाल में आने वाली धूल भरी हवाओं का प्रकोप भी नियंत्रित होगा।सबसे महत्वपूर्ण है कि राजस्थान के द्वारा पतसाल गांव की पुलिया होकर आने वाले अजान बोध के पानी को रोक लिए जाने के बावजूद रसूलपुर , सीकरी हिस्सा चतुर्थ (Sikri Hissa IV), नगर (Nagar), दादूपुरा (Dadupura),पतसाल आदि सहित एक दर्जन से अधिक गांवों का पानी बांध में पहुंचता है,लेकिन बांध के गेट क्षतिग्रस्त होने के कारण पानी रुकता नहीं है।

*–कोई कार्ययोजना प्रस्तावित नहीं*

तेरह मोरी बांध संचय के लिये पानी की भरपूर उपलब्धता होने के बावजूद निष्प्रयोज्य कर रखा गया है। 1972 में ओवरफ्लो के दबाव के फलस्वरूप बांध की दो मोरियां बन्द हो गयी थीं,बाद में इन्हें ठीक करवाने के स्थान पर सिंचाई विभाग ने बांध की जल संचय क्षमता को सुधारने के स्थान पर इसे उपेक्षित कर डाला है। इसमें सुधार कर पुन:जल संभरण उपयुक्त करने के लिये अब तक कोई कार्य योजना नहीं बनाई है।जब कोयी कार्ययोजना ही अब तक प्रस्तावित नहीं की है तो फिर उसे शासन से स्वीकृति और धन उपलब्धता के लिए प्रयासों का प्रश्न ही उठता ।

*-ग्वालियर गेट के ‘शाही तालाब’ में पानी रहता है सालभर*

फतेहपुर सीकरी में ग्वालियर गेट के पास भी ‘शाही तालाब’ के रूप में पहचान वाली एक महत्वपूर्ण जलसंरचना है।जिसे कि फतेहपुर सीकरी की पहाडियों के दक्षिणी ढलान और बडे जलग्रह मैदानी क्षेत्र से भी भरपूर पानी मिलता है। तालाब के निकट के किसान इस पानी का उपयोग सिंचाई के लिए करते मिल जायेंगे।यह बात अलग है कि मानसून काल में जल उपलब्धता को दृष्टिगत तालाब का जल संचय क्षेत्र छोटा है।नगर पालिका परिषद इस जलाशय की व्यवस्था को लेकर सक्रिय रहती है,तालाब के तट पर ही अंत्येष्टि स्थल है।अक्सर लोग तालाब में स्नान करते मिल जायेंगे।

*–स्थानीय जलग्राही क्षेत्र से आती है भरपूर जलराशि*

मौजूदा पर्यावरणीय और भीषण जलकिल्लत को दृष्टिगत तेरहमोरी बांध को पुनः: सुचारू करना सामायिक जरूरत बन चुका है।राजस्थान के द्वारा अजान बांध से पानी छोडा जाना बन्द कर दिये जाने के बावजूद सामान्य से कम वर्षा होने पर भी बांध में मानसून काल में भरपूर जलराशि पहुंचती है, किंतु बांध के गेटों के निष्प्रोज्य हो जाने के कारण पानी बांध में ठहराता नहीं है। फलस्वरूप क्षेत्र में भूजल रिचार्ज नहीं होता ।

 

-टी टी जैड के लिये महत्वपूर्ण

बांध के शुष्क होने से राजस्थान की ओर से आकर ताज ट्रिपेजियम जोन के पर्यावरण को धूल भरी हवाओं से भरपूर करने वाली हवाये और अधिक घातक हो जाती हैं।इनमें सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (SPM) की मौजूदगी रहती है। इन कणों (जैसे PM10, PM2.5)में से अनेक फेफड़ों में गहराई तक जाकर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं और प्रदूषण बढ़ाते हैं।

*–नागरिक चाहते है बांध सुचारू हो*

क्षेत्र के निवासी और बड़े किसान श्री अमरनाथ पाराशर ने बताया कि फतेहपुर सीकरी की स्थलाकृति में ढलान है ।परिणाम स्वरूप शहर का अधिकांश वर्षा जल मौजूदा ड्रेनेज सिस्टम से बहकर तेरहमोरी बांध में पहुंच जाता ।इसी प्रकार विद्य ढलान पहाड़ियों की मानसून कालीन जलधाराये भी इसी जलाशय में योगदान देती हैं।तेरहा मोरी बांध तीन ओर पहाड़ियों से घिरा स्वाभाविक जल संचय उपयुक्त संरचना है।आपसपास के जलग्रहण क्षेत्र में सबसे निचले स्तर पर होने से बांध को पुन:फंक्शनल करना तकनीकी दृष्टि से अत्यंत सहज है। वर्षा के दौरान यदि पानी का उचित प्रबंधन किया जाए तो जलाशय का विस्तार हिरन मीनार तक पहुंचने की क्षमता रखता है।
फतेहपुर सीकरी चार हिस्सा के निवासी पत्रकार महावीर वर्मा ने कहा है कि राजस्थान के अजान बांध से पानी छोडा जाना बन्द कर दिये जाने के बावजूद मानसून काल में तेरह मोरी बांध को भरने के लिये स्थानीय जलग्राही क्षेत्र से भरपूर जलराशि उपलब्ध होती है।उन्होंने बताया कि सामाजिक सरोकारों के फलस्वरूप वह तेरहमारी बांध व खारी नदी में पानी के प्रवाह को लेकर हमेशा प्रयत्नशील रहे हैं। उनका कहना है कि तेहरा मोरी बांध पर एक बार जलसंचय उपयुक्त हो जाये तो उपलब्ध ताजा वर्षा जल न केवल भूजल को रिचार्ज करेगा, बल्कि यह खारी नदी को भी मानसून थमने के बाद डिस्चार्ज जलराशि से भरपूर प्रवाह देगा। जिससे किसानों को मदद मिलेगी और नदी के तल के पास तालाबों को भरा जा सकेगा ।उन्होंने कहा कि बांध को निष्प्रोजय बनाये रखने के कारण खारी नदी बनी रहने वाली वर्तमान प्रवाह शून्य स्थिति को दृष्टिगत आगरा कैनाल की एफ एस ब्रांच का पानी दौलताबाद एक्युडिक्ट के एस्केप से खारी में डालना पडता है।

युधिष्ठिर के समय फतेहपुर सीकरी थी पानी की भरपूरिता

‘साइक’ (Saik) जिसका अर्थ है पानी से घिरा क्षेत्र ।भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा 1999-2000 में फतेहपुर सीकरी के किले के पास स्थित छोट से टीले ‘बीर छबीली टीला’ (Bir Chhabili Tila) की अन्वेषण परक खुदाई में तमाम पुरातात्विक महत्व पुरा साक्ष्य प्राप्त किये हैं।
युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के लिए जब सहदेव अपनी सेना के साथ इंद्रप्रस्थ से दक्षिण दिशा की विजय पर निकले थे, तब मार्ग में उन्होंने मत्स्य देश (विराटनगर/जयपुर क्षेत्र) और शूरसेन (मथुरा क्षेत्र) के राजाओं को पराजित किया था।यही नहीं मथुरा और राजस्थान के बीच के ‘साइक’ या ‘सैकरिक्य’ कहे जाने वाले इस जल-समृद्ध क्षेत्र के राजाओं को अपने अधीन किया और उनसे कर (tribute) प्राप्त किया था।यह पुरानी दास्तानें है,फतेहपुर सीकरी अब अधिकांश प्राकृतिक जल स्रोत खो चुका है, इनमें सबसे महत्वपूर्ण 20वीं सदी के 70 वें दशक तक तक उपयोगी रही तेरह मोरी बांध जल संरचना है।मानसून कालीन फतेहपुर सीकरी की रिज (पहाड़ी) के उत्तरी ढलान की स्थानीय जलधाराओं,दक्षिणी ढलान की भैसा मोरी होकर पहुंचने वाले प्रवह को संचित करने तथा भरतपुर जनपद के अजान बांध के ‘बृजेन्द्र मोरी’ के खारी नदी के रूप में किये जाने वाले डिस्चार्ज को रेग्युलेट करने के लिये तेरहमोरी बांध महत्वपूर्ण जल संरचना है।

अकबर के समय शुरू हुआ था जलसंचय

प्राकृतिक रूप से सीमित जल संचयन के लिये उपयोग होती रही इस जल संरचना को मुगल सम्राट अकबर के शासन काल में विशाल झील और रेगुलेटर के रूप में विकसित किया गया। निर्मित यह कृत्रिम झील (जिसे ‘गुलाबी’ या ‘सीकरी झील’ भी कहा जाता था) लगभग 32 किलोमीटर (20 मील) के घेरे में फैली हुई थी।
जलाशय उत्तर में रसूलपुर (Rasulpur) और दक्षिण में सीकरी की पहाड़ी (Sikri Ridge) के बीच की प्राकृतिक गहराई में स्थित है। इसका विस्तार आगरा-भरतपुर रोड के उत्तर तक था, जहाँ तेरा मोरी (13 द्वारों वाला बांध) तक था।
यह विशाल डूब क्षेत्र न केवल शहर के लिए पानी का मुख्य स्रोत था, बल्कि यह किले की उत्तरी दिशा के लिए एक प्राकृतिक रक्षा कवच का काम भी करता था, संभत: इसी लिये फतेहपुर सीकरी किले की झील की ओर दीवारें नहीं बनाई गई थीं।

अब बदहाली का दौर

वर्तमान में यह जलाशय पूरी तरह सूख चुका है सैल्युस गेट क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण अब बांध में पानी नहीं रुकता।बांध को फतेहपुर सीकरी स्मारक का अभिन्न अंग है,लोकसभा में सांसद राजकुमार चाहर के द्वारा पूछे एक प्रश्न में भारत सरकार ने बताया है कि तेरह मोरी बांध की मरम्मत या अनुरक्षण के लिये उ प्र शासन के द्वारा धन उपलब्ध करवाये जाने का प्रावधान है।सिचाई विभाग के तृतीय मण्डल, सिंचाई कार्य (IIIrd Circle Irrigation Works) के आगरा नहर के लोअर खंड के अधिशासी अभियंता के तहत यह बांध आता है और उनके द्वारा तमाम बार मांग करने के बावजूद बांध के सुलूस गेट (Sluice Gate) गेटो को फंक्शनल बनाने या नये लगवाने को पिछले पांच सालों से कोई योजना बनायी ही नहीं गयी है,फलस्वरूप फतेहपुर सीकरी के गांवों के लिये उपयोगी साबित हो सकने वाला यह निकाय पूरी तरह से निप्रयोज्य है।

सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा की टीम में -अनिल शर्मा, राजीव सक्सेना, राजेंद्र शुक्ला और असलम सलीमी शामिल थे .

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