NOW HINDUSTAN कोरबा. नगर निगम कोरबा में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच गतिरोध गहरा गया है। विकास कार्यों की जानकारी न दिए जाने और लोकार्पण-शिलान्यास कार्यक्रमों में आमंत्रित न करने के विरोध में सभापति नूतन सिंह ठाकुर सोमवार शाम अपने कार्यालय में जमीन पर बैठ गए। उन्होंने जमीन पर बैठकर ही अपने कार्य निपटाए और विरोध दर्ज कराया। पार्षदों ने भी सभापति का समर्थन करते हुए अधिकारियों पर आरोप लगाए।
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जनप्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें अलग-अलग वार्डों में होने वाले विकास कार्यों की कोई जानकारी नहीं दी जाती। उनके अनुसार, यह स्थिति तब और असहज हो जाती है, जब उनके ही वार्ड में किसी कार्य का लोकार्पण या शिलान्यास होता है, लेकिन उन्हें आमंत्रित तक नहीं किया जाता। पार्षदों ने अधिकारियों पर लगातार जनप्रतिनिधियों की गरिमा की अनदेखी का आरोप लगाया है, जिससे वार्डों के विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
उनका कहना है कि इस तरह की अवहेलना को वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए आयुक्त ने निगम सचिव को नोटिस जारी किया है। आयुक्त ने यह स्पष्ट करने को कहा कि जनप्रतिनिधियों को सूचना देने में कहां और क्यों चूक हो रही है। दूसरी ओर, निगम के अधिकारियों का कहना है कि जिन भी कार्यक्रमों का लोकार्पण या शिलान्यास किया गया है, उनमें स्थानीय विधायक और मंत्री लखन लाल देवांगन को नियमानुसार आमंत्रित किया गया था।
पार्षद अब्दुल रहमान ने जिले के महापौर, अध्यक्ष और पार्षदों को किसी भी कार्यक्रम में आमंत्रित न किए जाने पर कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों को विकास कार्यों से संबंधित कोई जानकारी भी नहीं दी जाती, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। रहमान ने कहा कि इस प्रकार की अनदेखी और सम्मान के साथ खिलवाड़ की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इसी के विरोध में जमीन पर बैठकर अपना प्रदर्शन किया। ऐसा होने पर भविष्य में कार्यक्रम स्थल पर प्रदर्शन करेंगे।
पार्षदों को शासकीय कार्यक्रमों से रखा दूर महापौर भी रहीं अनभिज्ञ
नगर पालिक निगम के सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने हाल ही हुए शासकीय कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों को सूचना न दिए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने आयुक्त को इस संबंध में अवगत कराया है। सभापति ठाकुर ने बताया कि कुछ दिनों पहले कई वार्डों में लोकार्पण, भूमिपूजन और विकास कार्यों जैसे शासकीय कार्यक्रम कार्य हुए, जिनकी जनकी जानकारी पार्षदों तक नहीं पहुंचीं। उन्होंने कहा कि यह बेहद आपत्तिजनक है कि ऐसे महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों की सूचना न तो पार्षदों को दी गई और न ही महापौर को।
नूतन ठाकुर ने आयुक्त को स्पष्ट किया कि इस तरह की अवहेलना स्वीकार्य नहीं होगी और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने जिम्मेदारी तय करने की मांग की। सभापति ने कहा कि वे नगर पालिक निगम के सदन के अध्यक्ष हैं और यदि सदन के सदस्यों, यानी पार्षदों का इस तरह से अपमान किया जाएगा, तो अध्यक्ष के रूप में उनकी कुर्सी पर बैठकर काम करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। सोशल मीडिया के युग में ई-कार्ड के माध्यम से भी सूचना दी जा सकती थी, लेकिन वह भी नहीं किया गया।
निगम सचिव को आयुक्त का नोटिस
नगर पालिक निगम के आयुक्त आशुतोष पांडेय ने निगम सचिव को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस हाल ही हुए एक शिलान्यास समारोह में महापौर और सभी पार्षदों को आमंत्रित न करने के संबंध में दिया गया है। समारोह में मंत्री लखन लाल देवांगन मुख्य अतिथि थे। आयुक्त पांडे ने स्पष्ट किया कि नगर निगम एक स्वायत्त संस्था होने के बावजूद राज्य सरकार के अधीन कार्य करती है। उन्होंने बताया कि जहां महापौर निगम के प्रमुख होते हैं, वहीं प्रशासनिक प्रमुख के तौर पर आयुक्त कार्य करते हैं। सभापति को भूमिका सामान्य सभा की अध्यक्षता करने की है।
आयुक्त कहा कि निगम सचिव की यह भूमिका है कि वह ऐसे कार्यक्रमों संबंधित अधिकारियों, पार्षदों और महापौर को आमंत्रित करें, भले ही यह सूचना डिजिटल माध्यमों से दी जाए। आयुक्त ने यह भी कहा कि मंत्री के प्रोटोकॉल के अधीन निगम का पूरा परिवार आता है और मंत्री के आतिथ्य में होने वाले कार्यों को मिलकर सफल बनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि सभापति के विरोध और उनके पद की गरिमा को देखते हुए निगम सचिव को यह नोटिस जारी किया गया है। सचिव के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
