NOW HINDUSTAN. Korba. जिले के ग्राम पंचायत गुरसिया में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) से लगे मुख्य मार्ग के किनारे शासकीय भूमि पर खुलेआम राखड़ (फ्लाई ऐश) डंपिंग का मामला एक बार फिर सामने आया है। क्षेत्र में बड़ी मात्रा में राखड़ के ढेर जमा होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियमों और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी करते हुए खुले स्थान पर राखड़ डंप की जा रही है, जिससे आसपास के इलाकों में प्रदूषण फैलने लगा है। मौके पर दिखाई दे रही तस्वीरों में भारी वाहनों से राखड़ गिराई जाती नजर आ रही है।
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सड़क किनारे जमा राखड़ के विशाल ढेर अब हवा के साथ उड़कर आसपास की बस्तियों, घरों और मुख्य मार्ग तक पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि राखड़ की महीन धूल वातावरण में घुलकर लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। वहीं यह धूल खाद्य सामग्री, पेयजल स्रोतों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं को भी दूषित कर रही है। स्थिति की गंभीरता इस कारण भी बढ़ जाती है क्योंकि जिस स्थान पर डंपिंग की जा रही है, उसके समीप साप्ताहिक बाजार लगता है। इसके अलावा पास ही एक अस्पताल और सरस्वती शिशु मंदिर संचालित है। आसपास घनी आबादी वाली बस्ती होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों का प्रतिदिन आवागमन बना रहता है। ऐसे में उड़ती राखड़ बच्चों, मरीजों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
ग्रामीणों के अनुसार बाजार के दिनों में हालात और अधिक चिंताजनक हो जाते हैं। तेज हवा के साथ उड़ने वाली राखड़ दुकानदारों और ग्राहकों को प्रभावित करती है। अस्पताल आने वाले मरीजों के लिए भी प्रदूषित वातावरण स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य सड़क तक राखड़ पहुंचने से वाहन चालकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शंकर ट्रांसपोर्टर द्वारा बिना किसी स्पष्ट सार्वजनिक सूचना बोर्ड के डंपिंग कार्य किया जा रहा है। वहीं यह भी चर्चा है कि ग्राम पंचायत स्तर पर डंपिंग के लिए एनओसी दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि कई ग्रामीणों का दावा है कि इस विषय पर ग्रामसभा में व्यापक चर्चा नहीं हुई और न ही गांव के अधिकांश लोगों की सहमति ली गई। यह पहला अवसर नहीं है जब गुरसिया में राखड़ डंपिंग को लेकर सवाल उठे हों। इससे पहले भी इसी प्रकार की लापरवाही और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। ऐसे में अब प्रशासन की भूमिका पर लोगों की नजरें टिक गई हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या डंपिंग के लिए आवश्यक विभागीय और पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त की गई हैं तथा क्या निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा है? ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल, अस्पताल, बाजार और आबादी के बीच हो रही इस डंपिंग पर समय रहते रोक नहीं लगी तो यह आने वाले दिनों में गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।
