NOW HINDUSTAN. कोरबा-पश्चिम बांकीमोंगरा नगर पालिका की उपाध्यक्षा व उनके पति श्रमिक नेता सहित लगभग 25 अन्य ग्रामीण के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। इन पर शासकीय कार्य में बाधा, आर्थिक नुकसान, कर्मचारियों को धमकी, शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की धमकी तथा अन्य दंडनीय कृत्यों का आरोप लगाया गया है।
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जानकारी के अनुसार घटनाक्रम 22 जून को प्रातः लगभग 10:30 बजे का बताया जा रहा हैं। जब नगर पालिका उपाध्यक्ष व उसके पति सहित लगभग 25 अन्य व्यक्ति पूर्व सूचना प्रदान कर विभिन्न मांगों व मुद्दों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलन का नेतृत्व नगर पालिका उपाध्यक्ष कर रही थीं जो बांकीमोंगरा नगर पालिका की उपाध्यक्षा हैं। इस घटनाक्रम को लेकर प्रबंधन का आरोप है कि “सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया की अनुसांगिक कंपनी एसईसीएल बिलासपुर के अधीन कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित एवं संचालित खुले मुहाने की गेवरा कोयला परियोजना अंतर्गत बिना किसी वैधानिक अनुमति के जबरन गेवरा परियोजना के खनन क्षेत्र में प्रवेश कर गए। खनन क्षेत्र में प्रवेश करने के पश्चात उक्त सभी व्यक्तियों ने बलपूर्वक एवं गैरकानूनी तरीके से वहाँ संचालित खनन कार्य में हस्तक्षेप किया तथा चल रही मशीनों एवं खनन कार्य को जबरन रुकवा दिया। जब अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा उन्हें समझाने का प्रयास किया गया, तब उन्होंने कर्मचारियों धमकी दी तथा शासकीय एवं सार्वजनिक संपति को नुकसान पहुँचाने की धमकी देकर भय एवं अशांति का वातावरण निर्मित किया। इन व्यक्तियों के कृत्य के कारण खदान का कार्य पूर्णतः बाधित हो गया, जिससे एसईसीएल को लगभग ₹50,00,000 (पचास लाख रुपये) का आर्थिक नुकसान हुआ। उनका यह कृत्य न केवल शासकीय कार्य में अवैध बाधा उत्पन्न करने वाला है, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था एवं कानून- व्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा है।”
जानकारी के अनुसार एफआईआर में दर्ज कराया गया है कि “खनन क्षेत्र एक अत्यंत संवेदनशील एवं प्रतिबंधित कार्यस्थल है, जहाँ बिना अनुमति किसी भी व्यक्ति का प्रवेश निषिद्ध है। उक्त व्यक्तियों द्वारा बिना किसी वैधानिक अनुमति के जबरन खदान क्षेत्र में प्रवेश करना न केवल सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि इससे किसी भी समय गंभीर दुर्घटना, जनहानि अथवा अन्य अप्रिय घटना घटित होने की प्रबल संभावना उत्पन्न हो सकती थी। यदि उनके इस अवैध कृत्य के दौरान कोई दुर्घटना या जनहानि होती, तो उसके लिए पूर्णतः वही व्यक्ति उत्तरदायी होंगे। उनके इस कृत्य से खदान की सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों के जीवन एवं सार्वजनिक हित को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ। भारत सरकार का एक सार्वजनिक उपक्रम है तथा गेवरा परियोजना देश की महत्वपूर्ण कोयला खदानों में से एक है। यहाँ से उत्पादित कोयला देश के विद्युत उत्पादन एवं ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में, जब देश में ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने के लिए निरंतर कोयला उत्पादन आवश्यक है, ऐसे समय में जानबूझकर खनन कार्य को बलपूर्वक रोकना केवल एसईसीएल के आर्थिक हितों के विरुद्ध ही नहीं, बल्कि शासकीय कार्य में अवैध बाधा उत्पन्न करना एवं व्यापक जनहित को प्रभावित करने वाला गंभीर कृत्य है।”
बताया जा रहा हैं की मामले में सुरक्षा निरीक्षक की रिपोर्ट पर उनके विरुद्ध धारा 126(2), 127(2), 3(5)-बीएनएस के तहत दीपका थाना में जुर्म दर्ज किया गया है।
